‘पीड़िता के परिवार की आपत्ति पर जल्द फैसला करे ट्रायल कोर्ट’

नवभारतटाइम्स.कॉम
supreme courts directive trial court to decide on victims familys objection in gurgaon rape case soon
n NBT रिपोर्ट, नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने गुड़गांव में तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म के चर्चित मामले में गुरुवार को ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह पीड़िता के परिवार की तरफ से जांच पर असंतोष जताते हुए दायर की गई प्रोटेस्ट पिटीशन पर जल्द और निष्पक्ष निर्णय करे। अदालत ने यह भी कहा कि बच्ची के परिवार की मुआवजे से जुड़ी याचिका पर भी जल्द फैसला लिया जाए और उन्हें मामले से संबंधित जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने पर विचार किया जाए, ताकि वे अदालत की कार्यवाही में प्रभावी ढंग से सहयोग कर सकें।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। सुनवाई के दौरान पीड़िता के परिवार की ओर से पेश वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित तीन महिला आईपीएस अधिकारियों की विशेष जांच टीम (एसआईटी) की जांच से परिवार संतुष्ट नहीं है। इसी कारण उन्होंने ट्रायल कोर्ट में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को कानून के तहत निष्पक्ष तरीके से उस याचिका पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर कमिटी को लगाई थी फटकार : सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले हरियाणा पुलिस और गुड़गांव की चाइल्ड वेलफेयर कमिटी के रवैये को "शर्मनाक", "लापरवाह" और "असंवेदनशील" करार देते हुए कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के लिए एडीजीपी कला रामचंद्रन, एसपी अंशु सिंगला और डीसीपी जसलीन कौर की एसआईटी गठित की थी। साथ ही गुड़गांव के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को निर्देश दिया था कि मामले की सुनवाई महिला न्यायिक अधिकारी की अध्यक्षता वाली विशेष पॉक्सो अदालत में कराई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने पहले की सुनवाई में जांच के तरीके पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि बच्ची को अपराध से भी अधिक भयावह अनुभव जांच प्रक्रिया के दौरान झेलने पड़े। अदालत ने यह भी कहा था कि पुलिस अधिकारियों ने जांच के दौरान कथित तौर पर पीड़ित बच्ची के बयान को कमजोर करने और उसके माता-पिता की शिकायतों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की कोशिश की।