n NBT न्यूज, नोएडा
बिजली विभाग एक बार फिर उसी विवादित राह पर चलने की तैयारी कर रहा है, जहां से उसे कुछ समय पहले ही घरेलू उपभोक्ताओं के भारी विरोध के कारण कदम पीछे खींचने पड़े थे। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) अब शहर के औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाने की गुप्त रूप से बिसात बिछा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, पहले चरण में करीब 6,000 व्यावसायिक और औद्योगिक कनेक्शनों को स्मार्ट मीटर से लैस करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है, लेकिन इस सुगबुगाहट मात्र से ही उद्योग जगत और व्यापारिक संगठनों में हड़कंप मच गया है।
इससे पहले घरेलू उपभोक्ताओं के यहां जबरन स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की योजना का निवासियों समेत विभिन्न संगठनों ने सड़क से लेकर शासन तक पुरजोर विरोध किया था। मामला इतना बढ़ा कि उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री को स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ा और अंततः प्रीपेड व्यवस्था को निरस्त कर उसे पोस्टपेड मोड में बदलना पड़ा।
अब वही कहानी उद्योगों के साथ दोहराने की कोशिश हो रही है, जिससे उद्यमियों के बीच अविश्वास की खाई और गहरी हो गई है। उद्यमियों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि विभाग ने इतने बड़े बदलाव से पहले स्टेकहोल्डर्स (हितधारकों) से कोई परामर्श नहीं किया। औद्योगिक इकाइयों में बिजली की खपत और लोड का गणित घरेलू कनेक्शनों से बिल्कुल भिन्न होता है। उद्यमियों को डर है कि यदि स्मार्ट मीटर में कोई तकनीकी खराबी आई या सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी हुई, तो पूरी फैक्ट्री की मशीनें ठप हो सकती हैं, जिससे करोड़ों का उत्पादन प्रभावित होगा। साथ ही, प्रीपेड व्यवस्था की चर्चा ने भी उनकी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि उद्योगों के लिए बिलिंग का सटीक और पारदर्शी होना अनिवार्य है। व्यापारिक संगठनों का तर्क है कि नोएडा का राजस्व सबसे ज्यादा उद्योगों और व्यावसायिक गतिविधियों से आता है। ऐसे में विभाग को पहले अपना पुराना और जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर, जली हुई केबलें और ओवरलोडेड ट्रांसफार्मर सुधारने चाहिए। लेकिन विभाग जमीनी सुधार के बजाय डिजिटल मीटर थोपने को प्राथमिकता दे रहा है।

