n NBT रिपोर्ट, फरीदाबाद
नेहरू कॉलोनी में धार्मिक स्थल, मकानों और दुकानों पर हुई तोड़फोड़ की प्रशासनिक कार्रवाई के बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। सोमवार को बड़ी संख्या में स्थानीय लोग अपनी समस्याओं और नाराजगी को लेकर सड़कों पर उतरने की कोशिश करते नजर आए। हालांकि, पहले से तैनात पुलिस बल ने लोगों को आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान कई स्थानों पर स्थानीय निवासियों और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
मूलभूत सुविधाएं बाधित होने का आरोप : स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान कई मकानों और दुकानों को नुकसान पहुंचा है। साथ ही बिजली और पानी के कनेक्शन काटे जाने से प्रभावित परिवारों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि भीषण गर्मी में बिजली-पानी जैसी आवश्यक सुविधाएं बंद होने से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई परिवारों ने प्रशासन से तत्काल राहत और सुविधाएं बहाल करने की मांग की है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे संदेशों और पोस्टों की भी निगरानी की जा रही है। यदि कोई व्यक्ति भ्रामक या भड़काऊ सामग्री साझा करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
तंबू से शुरू हुआ कब्जा, पक्के मकान तक पहुंचा
शहरवासियों की मानें तो साल 1975-76 में केवल 20 परिवार ने पहाड़ों पर तंबू डालकर रहना शुरू किया था। धीरे-धीरे यूपी, बिहार, राजस्थान से आकर लोग यहां बसने शुरू हो गए। ये जमीन पुनर्वास विभाग की बताई जा रही है। उस समय फरीदाबाद नगर निगम भी अस्तित्व में नहीं था। सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर कोई जागरूकता भी नहीं थी। शुरुआत में कब्जा करने वाले इन 20 परिवार ने धीरे-धीरे स्थायी निर्माण बनाना शुरू कर दिया। इन 50 सालों में यहां करीब 20 से 22 हजार छोटे-छाेटे मकान बनकर खड़े हो गए।

