चेकिंग बंद होते ही फिर से दौड़ने लगीं डग्गामार बसें

नवभारतटाइम्स.कॉम

गाजियाबाद में चेकिंग अभियान रुकते ही डग्गामार बसें फिर से सड़कों पर उतर आई हैं। ये बसें अवैध रूप से चल रही हैं और यात्रियों की जान जोखिम में डाल रही हैं। इनसे सरकारी खजाने को भी करोड़ों का नुकसान हो रहा है। ये बसें आनंद विहार, मोहन नगर, लालकुआं जैसे प्रमुख स्थानों से संचालित हो रही हैं।

as soon as checking stops illegal buses start running again putting passengers lives at risk

n NBT रिपोर्ट, गाजियाबाद

अवैध और बिना परमिट के डग्गामार बसें फिर से सड़कों पर दौड़ रहीं हैं। परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन की ढुलमुल कार्यप्रणाली के कारण ही इन बसों का संचालन हो रहा है। चेकिंग अभियान सुस्त पड़ते ही बसें दोबारा सड़कों पर दिखने लगती है।पिछले दिनों परिवहन विभाग ने अभियान चलाकर कुछ बसों पर कार्रवाई भी की थी। अब ऐसा लगता है कि कार्रवाई महज खानापूर्ति बनकर रह गई है। बिना वैध दस्तावेजों और सुरक्षा मानकों के दौड़ने वाली ये बसें न सिर्फ यात्रियों की जान जोखिम में डाल रही हैं, बल्कि सरकारी खजाने को भी घटा रही हैं।

इन बसों के मुख्य ठिकाने

डग्गामार बसों के संचालक बेहद संगठित तरीके से काम करते हैं। शहर के प्रमुख चौराहों और मुख्य सड़कों को ही इन बस ऑपरेटरों ने अपना अवैध बस स्टैंड बना लिया है। सबसे ज्यादा डग्गामार बसें आनंद विहार बॉर्डर (कौशाम्बी के पास), मोहन नगर चौराहा, लालकुआं, डासना फ्लाईओवर और हापुड़ चुंगी से धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं। इसके अलावा लोनी बॉर्डर और यूपी गेट के पास भी अवैध रूप से सवारियां भरने का खेल चौबीसों घंटे चलता रहता है।

इन रूटों पर चलती हैं बसें

ये बसें गाजियाबाद को उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और पड़ोसी राज्यों से जोड़ती हैं। मुख्य रूप से आनंद विहार और लालकुआं से बरेली, बदायूं, मुरादाबाद, अलीगढ़, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर और मथुरा के लिए सीधी बसें चलाई जाती हैं। इसके साथ ही लंबी दूरी के रूटों जैसे कानपुर, लखनऊ और उत्तराखंड के हरिद्वार व देहरादून के लिए भी बिना परमिट की स्लीपर और एसी बसें धड़ल्ले से चल रही हैं। रोडवेज बसों से कम किराए का लालच देकर यात्रियों को इनमें बैठाया जाता है।

सरकारी खजाने पर करोड़ों की चपत: इन अवैध बसों के संचालन से उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (रोडवेज) और एआरटीओ विभाग को हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का सीधा नुकसान हो रहा है। ये बसें न तो सरकार को पैसेंजर टैक्स देती हैं और न ही इनके पास वैध कमर्शल परमिट होता है। इसके कारण रोडवेज की बसों को सवारियां नहीं मिल पातीं और सरकारी बसें खाली दौड़ने को मजबूर हैं। टैक्स चोरी और रोडवेज की कमाई पर डाका डालने के इस खेल से अकेले गाजियाबाद क्षेत्र को भारी आर्थिक चपत लग रही है।

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