पर्यावरण संरक्षण की दिशा में की अनूठी पहल
NBT न्यूज, फरीदाबाद : शहर में कुछ लोग पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी पहल कर रहे है। जिन जगहों पर पहले कूड़ा रहता था उस जगह पर आज घने पौधे और हरियाली दिखाई देती है। सेक्टर 15 में कुछ निवासियों की पहल से अपने शहर में ही मिनी फॉरेस्ट देखने को मिल रहे है। निवासी अभी तक 7 मिनी फॉरेस्ट बना चुके है और अब 45 अन्य जगहों पर मिनी फॉरेस्ट बनाने की तैयारी में लगे हुए है।
निवासी संजय बत्रा ने बताया कि करीब आठ साल पहले उन्होंने कुछ निवासियों के साथ मिलकर यह पहल शुरू की थी। सेक्टर में कुछ खाली जगह और ग्रीनबेल्ट पर लोग कूड़ा-कचरा फेंक देते थे, जिससे एरिया की स्वच्छता और सुंदरता प्रभावित होती थी। कई बार सफाई करवाने के बावजूद लोग दोबारा कूड़ा डाल देते थे। इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए लोगों ने मिलकर इन खाली जगहों पर पौधारोपण कर मिनी फॉरेस्ट बनाने का काम शुरू किया। जिस एरिया में मिनी फॉरेस्ट बनाया वहां के लोगों को साफ हवा और हरियाली मिली, जिससे निवासी काफी खुश हुए। इसके बाद ऐसे ही मिनी फॉरेस्ट ओर जगहों पर बनाए गए, जिसमें बीआर भाटिया, एचके बत्रा, समर्थ सहित कई लोगों ने साथ दिया। आज निवासी मिलकर सेक्टर में सात मिनी फॉरेस्ट बना चुके है, जो एरिया की पहचान बन गए है। इन मिनी फॉरेस्ट में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए है और उनकी नियमित देखभाल भी की जा रही है। स्थानीय निवासी पौधों को पानी देने, सफाई करने और उनकी सुरक्षा का जिम्मा निभा रहे है। इन प्रयासों से एरिया का वातावरण साफ हुआ है, तापमान में भी कुछ हद तक कमी महसूस की जा रही है और पक्षियों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। अब निवासी अन्य जगहों पर भी मिनी फॉरेस्ट बनाने की तैयारी कर रहे है, जिससे निवासियों को हरियाली और साफ हवा मिल सके।
ग्रीन बेल्ट में बनाया जा रहा है घना जंगल :
शहर को हरा भरा बनाने के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की तरफ से भी प्रयास किए जा रहे हैं। एचएसवीपी दिल्ली - मुंबई एक्सप्रेस वे लिंक रोड के साथ अपने सेक्टरों की तरफ बनी ग्रीन बेल्ट को घने जंगल के रूप में विकसित कर रहा है। ग्रीन बेल्ट में लाखों पौधे लगाने की प्लानिंग है। मियावाकी पद्धति के तहत यहां पर पौधारोपण किया जा रहा है। बड़े पौधों के साथ नीचे छोटे पौधे लगाए जा रहे हैं और साथ में झाड़ियां भी लगाई जा रही हैं ताकि यह पूरे तरह जंगल का रूप ले सके। कुछ जगहों पर वाटर रिचार्ज जोन व पार्क भी विकसित हो रहे हैं। एचएसवीपी के एसई संदीप दहिया ने बताया कि सेक्टर 59, सेक्टर आठ से सेक्टर 17 तक और सेक्टर 37 के पास अभी तक करीब 80 हजार से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। इस बार भी बारिश के दौरान करीब 39 हजार पौधे लगाने का टारगेट है। आने वाले कुछ सालों में यहां साढ़े चार लाख से अधिक पौधे लगाने का टारगेट तय किया गया है।
औषधीय पौधों से भी पर्यावरण संरक्षण की मुहीम:
सेक्टर 9 में एक निवासी कई सालों से अपने घर पर बीज से औषधीय पौधे उगा रहे हैं। साथ ही उन्हें लोगों में बांट रहे है। एक ओर जहां यह प्रकृति और पारंपरिक चिकित्सा के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है वहीं यह पर्यावरण के संरक्षण और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने का एक सराहनीय प्रयास है। सेक्टर 9 में रहने वाले एससी सुनेजा ने बताया कि उनका जीवन लक्ष्य आठ लाख पौधे उगाना है। उन्होंने पिछले साल फरवरी महीने में औषधीय पौधों को तैयार कर उन्हें बांटने की मुहिम शुरू की। उनकी इस मुहिम से सैकड़ों लोग जुड़ चुके हैं, जिसका नतीजा है की वे शहर के कई सेक्टरों में हजारों औषधीय पौधे बांट चुके है। यह पहल न केवल औषधीय पौधों को बढ़ावा देने का एक प्रयास है, बल्कि लोगों को इनके स्वास्थ्य लाभों के प्रति जागरूक करना भी है। औषधीय पौधे न सिर्फ पर्यावरण को साफ-सुथरा रखने में मदद करते है, बल्कि कई तरह की बीमारियों में भी प्राकृतिक उपचार के रूप में काम आते है। उन्होंने पहले अपने सेक्टर के मिनी पार्क में एक छोटी सी नर्सरी बनाई और उसमें मोरिंगा, अपराजिता, शतावर, गेलोय, सदाबहार, सर्पगंधा और मरुआ जैसे पौधे उगाए और उन्हें लोगों में बांटा।


