पीटीआई, नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को विदेशी निवेशकों को एक बहुत बड़ी राहत दी है। अब विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉण्ड (G-Secs) से होने वाली ब्याज की कमाई और मुनाफे (कैपिटल गेन्स) पर कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा। सरकार ने यह कदम देश में विदेशी पूंजी लाने और डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये को सहारा देने के लिए उठाया है।
चूंकि इस समय संसद का सत्र नहीं चल रहा है और सरकार को लगा कि इस पर तुरंत कार्रवाई की जरूरत है, इसलिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत एक अध्यादेश जारी किया है। इसके जरिए इनकम टैक्स कानून में बदलाव किया गया है। यह छूट 1 अप्रैल से लागू मानी जाएगी। 1 अप्रैल या उसके बाद सरकारी बॉण्ड में किए गए निवेश से होने वाली कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।
अभी तक विदेशी निवेशकों को 12 महीने से ज्यादा समय तक रखे गए बॉण्ड पर 12.5 प्रतिशत का 'लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स ' देना पड़ता था। इसके अलावा, सरकारी बॉण्ड से मिलने वाले ब्याज पर भी 20 प्रतिशत का टैक्स लगता था। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि अब 15 साल, 30 साल और 40 साल की लंबी अवधि वाले सरकारी बॉण्ड के साथ-साथ 'सॉवरेन ग्रीन बॉण्ड' में भी विदेशी निवेशक बिना किसी रुकावट के पैसा लगा सकेंगे।
सरकार ने विदेशी निवेशकों पर लगी कई पुरानी पाबंदियों को भी हटा दिया है। अब सरकारी बॉण्ड में निवेश करने के लिए शॉर्ट-टर्म लिमिट या किसी एक बॉण्ड में निवेश की सीमा जैसी शर्तें नहीं रहेंगी। हालांकि, केंद्र सरकार के कुल बॉण्ड में 6 प्रतिशत और राज्य सरकार के बॉण्ड में 2 प्रतिशत निवेश की कुल सीमा (ओवरऑल लिमिट) पहले की तरह बनी रहेगी।
अब विदेशी नागरिक (PROI) सीधे तौर पर भारतीय कंपनियों के शेयर खरीद सकेंगे। पहले यह सुविधा सिर्फ एनआरआई (NRI) या ओसीआई (OCI) कार्ड धारकों को ही मिलती थी। अब एक विदेशी नागरिक किसी भी भारतीय कंपनी में 10 प्रतिशत तक हिस्सेदारी खरीद सकता है। पहले यह सीमा 5 प्रतिशत थी






