n NBT न्यूज, फरीदाबाद
पन्हैड़ा खुर्द गांव के पास स्थित जेवर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के कास्टिंग यार्ड में गुरुवार रात महज 20 सेकंड में दो विशाल गैन्ट्री क्रेन एक-एक कर गिर गईं। 8 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में देर रात 12 बजे 3 शव निकाले गए। बाद में इनकी पहचान की तो पता चला इनमें एक युवा इंजीनियर समेत तीन लोग थे, जबकि एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद निर्माण कार्यों में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
आंधी से बचने को कंटेनर में शरण लेना बना काल: जानकारी के मुताबिक, हादसे के समय निर्माणस्थल पर करीब 15 मजदूर काम कर रहे थे। शाम करीब साढ़े 4 बजे अचानक मौसम खराब हो गया और तेज आंधी चलने लगी। इससे बचने के लिए एनएचएआई के इंजीनियर सकातर सिंह, मजदूर मनीष, जयदेव कुमार और मानिक पास ही फ्लाईओवर के नीचे रखे एक कंटेनर में चले गए। लेकिन यह सुरक्षित ठिकाना ही उनके लिए जानलेवा साबित हुआ। कुछ ही पलों में दोनों गैन्ट्री क्रेन अपने ट्रैक से खिसक गईं और सीधे कंटेनर के ऊपर आ गिरीं। भारी भरकम लोहे के ढांचे के नीचे दबने से चारों लोग फंस गए। राहत की बात यह रही कि मानिक उस समय लेटा हुआ था, जिससे उसकी जान बच गई, हालांकि उसके हाथ में गंभीर चोट आई है।
काफी मुश्किलों भरा रहा रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और राहत टीमें मौके पर पहुंच गईं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने अन्य मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू किया। रेस्क्यू ऑपरेशन काफी जटिल था, क्योंकि क्रेन का वजन बहुत ज्यादा था और मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचना आसान नहीं था। करीब 8 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रात करीब 12 बजे तीनों शव बाहर निकाले गए।
प्रशासन को शुरुआत में आशंका थी कि कंटेनर में और भी लोग फंसे हो सकते हैं, इसलिए देर रात तक सर्च ऑपरेशन जारी रखा गया। बाद में पता चला कि बाकी मजदूर घटना स्थल से करीब एक किलोमीटर दूर सुरक्षित बैठे मिले, जिसके बाद राहत की सांस ली गई।






