भारत की इकॉनमी जिस बेहतरीन दौर से गुजर रही थी, उसे बरकरार रखना अब थोड़ा मुश्किल होता दिख रहा है। पिछले करीब एक साल से देश गोल्डीलॉक्स (Goldilocks) जैसी स्थिति में था। यानी एक ऐसा सुनहरा वक्त जब विकास दर मजबूत थी और महंगाई काबू में थी। इससे आर्थिक स्थिरता बनी हुई थी। लेकिन रिजर्व बैंक (RBI) की शुक्रवर को जारी जून की मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू इशारा कर रही है कि अब यह संतुलन बिगड़ने लगा है। पश्चिम एशिया में लंबे समय से चल रहे तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मौसम के जोखिमों को देखते हुए RBI ने महंगाई का अनुमान बढ़ा दिया है और विकास दर के अनुमान को घटा दिया है।
हालांकि, केंद्रीय बैंक का संदेश पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। RBI का मानना है कि भले ही बाहरी झटकों की वजह से आर्थिक माहौल मुश्किल हो रहा है, लेकिन भारत की बुनियादी स्थिति इतनी मजबूत है कि वह इन झटकों को झेल सकती है। RBI ने उम्मीद के मुताबिक अपनी ब्याज दरों (रीपो रेट) में कोई बदलाव नहीं किया। इसे 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया है। साथ ही बैंक ने अपना रुख न्यूट्रल रखा है।
बढ़ाया महंगाई का अनुमान : RBI ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रिटेल महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले आरबीआई ने इसके 4.6 प्रतिशत रहने का अंदाजा लगाया था।
घटाया ग्रोथ का अनुमान : रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की जीडीपी ग्रोथ (विकास दर) के अनुमान को घटा दिया है। अब इसे 6.9 प्रतिशत से कम करके 6.6 प्रतिशत कर दिया गया है। यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले वित्त वर्ष 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत रही थी। तब मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के दम पर देश की अर्थव्यवस्था 7.6 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी। उस दौरान महंगाई भी काफी कम थी।
घरेलू बाजार पर असर : आर्थिक हालात बिगड़ने की सबसे बड़ी वजह देश के बाहर है। RBI ने बार-बार पश्चिम एशिया के संघर्ष को सबसे बड़ा खतरा बताया है। इस कारण तेल की महंगाई बढ़ रही है। बढ़े हुए दामों का असर अब घरेलू बाजार पर भी दिखने लगा है।






