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नीस में 'भारत इनोवेट्स 2026' का आयोजन भारतीय प्रतिभा को वैश्विक मंच देगा। यह कार्यक्रम भारत और फ्रांस के संबंधों को मजबूत करेगा। देश के विशाल स्टार्टअप इकोसिस्टम को वैश्विक निवेशकों से जोड़ा जाएगा। यह आयोजन तकनीकी प्रतिस्पर्धा के दौर में भारत के लिए महत्वपूर्ण है। इससे भारत की क्षमता और फ्रांस के संसाधनों का मेल होगा।

bharat innovates 2026 confluence of indian talent and european capital in france paving the way for future innovation

फ्रांस के नीस शहर में रविवार से शुरू ' भारत इनोवेट्स 2026 ' देश में इनोवेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने का अवसर है। इससे भारतीय इनोवेटर्स को ग्लोबल इन्वेस्टर्स और इंडस्ट्री के टॉप लीडर्स से जुड़ने का मौका मिलेगा। यह आयोजन भारत और फ्रांस के संबंधों को भी एक नई ऊंचाई देगा।

चुनौतियों का जवाब । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में कार्यक्रम शुरू हुआ। यह आयोजन ऐसे वक्त में हो रहा है, जब तकनीकी प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। अमेरिका और चीन के बीच AI की ताकत पर नियंत्रण की होड़ है। इसी तरह, इनोवेशन पर भी कुछ खास देशों का ही कब्जा है। भारत की क्षमता और फ्रांस के संसाधनों को मिलाकर कई मौजूदा चुनौतियों का जवाब दिया जा सकता है।

स्टार्टअप्स में आगे । भारत के लिए यह कार्यक्रम खास तौर पर महत्वपूर्ण है। देश में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। यहां 2.3 लाख से अधिक स्टार्टअप हैं, जिनमें लगभग 25 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है। इसी सिस्टम से सवा सौ से ज्यादा यूनिकॉर्न यानी एक अरब डॉलर से अधिक वैल्यूएशन की कंपनियां खड़ी हो चुकी हैं। अब देश को दरकार है ऐसे इनोवेशन की, जो उसकी पहचान से जुड़े और जिसे दुनिया अपनाए। भारत में इसकी काबिलियत है।

रिसर्च में पीछे । इनोवेशन के लिए जिस तरह की लीडरशिप और स्किल चाहिए, देश के पास उसकी कमी नहीं। स्टार्टअप और इनोवेशन में सबसे आगे खड़े अमेरिका के टेक इकोसिस्टम का आधार भारतीय ही हैं। सिलिकॉन वैली में लगभग एक तिहाई टेक वर्कफोर्स भारत या भारतीय मूल के लोगों की है। फॉर्च्युन 500 की करीब 10% कंपनियों में भारतीय सीईओ हैं और इनमें एंथ्रोपिक, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट व अडोबी जैसे बड़े नाम हैं। इतनी क्षमताओं के बावजूद अगर इनोवेशन में भारत पीछे नजर आता है, तो वजह है रिसर्च एंड डिवेलपमेंट पर निवेश की कमी। साल 2024 में चीन ने रिसर्च एंड डिवेलपमेंट पर 785.9 अरब डॉलर खर्च किए थे और भारत ने केवल 75.7 अरब डॉलर। यह GDP का महज 0.7% हुआ। इसे बढ़ाना होगा।

भविष्य की बुनियाद । पीएम नरेंद्र मोदी ने 'भारत इनोवेट्स 2026' को भारतीय प्रतिभा और यूरोपीय पूंजी के बीच एक पुल बताया है। इस पुल का इस्तेमाल दूरियों को पाटने में करना चाहिए। इनोवेशन अब केवल तकनीक नहीं, भविष्य की राजनीति, अर्थव्यवस्था और वैश्विक नेतृत्व से जुड़ा मामला है। भविष्य में वही देश प्रभावशाली होंगे, जो बाकियों को कुछ नया देंगे।

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