n NBT न्यूज, लखनऊ: लखनऊ के सांस्कृतिक दिल की दो धड़कनें- नजाकत भरा 'कथक' और भक्ति से सराबोर 'बड़े मंगल का पर्व' रविवार शाम एक ही मंच पर जीवंत हो उठीं। मौका था कैसरबाग स्थित कलामंडपम सभागार में बिरजू महाराज कथक संस्थान की ग्रीष्मकालीन कथक कार्यशाला के समापन समारोह का। इस रंगारंग सांस्कृतिक संध्या की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि मंच पर 5 साल के बच्चों से लेकर 75 साल के बुजुर्गों तक ने एक साथ अपनी कला का जादू बिखेरा।
'हनुमान अष्टक' से शुरुआत: कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि और आकाशवाणी की कार्यक्रम प्रमुख सुमोना एस. पांडेय ने की। सांस्कृतिक संध्या का आगाज़ हनुमान अष्टक 'संकटमोचन नाम तिहारो' की प्रस्तुति से हुआ। इसमें बजरंगबली के दिव्य स्वरूप के साथ-साथ बड़े मंगल पर लखनऊवासियों की अगाध आस्था, सेवा और समर्पण भाव को बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया।
‘रोको ना डगर मोरी श्याम’: कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए नवांकुर कलाकारों ने तीन ताल पर अपनी सधी हुई कला का प्रदर्शन किया। इसके बाद नन्हे बाल कलाकारों ने राधा-कृष्ण के प्रेम-भाव पर आधारित सुप्रसिद्ध दादरा ‘रोको ना डगर मोरी श्याम’ पेश किया। सांस्कृतिक संध्या के मुख्य आकर्षण में भगवान श्रीराम के जीवन पर आधारित एक भव्य नृत्य-नाटिका का मंचन भी शामिल रहा। इसमें सीता-राम का अटूट प्रेम, शूर्पणखा प्रसंग, श्रीराम की गौरवपूर्ण वापसी के दृश्यों को कथक के जरिए परदे पर उतारा गया। इस पूरी प्रस्तुति का नृत्य निर्देशन डॉ. उपासना दीक्षित ने किया था। इस खास मौके पर संस्थान की अध्यक्ष प्रो. कुमकुम धर और भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के तालवाद्य विभाग के अध्यक्ष मनोज मिश्रा समेत शहर के बड़ी संख्या में कला व संगीत प्रेमी मौजूद रहे।


