nNBT रिपोर्ट, गाजियाबाद
मसूरी नहर में जेल से रिहा होने के बाद दिव्यांग युवक गिरधर बिष्ट का शव मिलने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मानसिक रूप से बीमार युवक को जेल भेजने और रिहाई के बाद उसके लापता होने को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। परिजनों की शिकायत पर मसूरी थाने में सात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। वैशाली सेक्टर-5 की कल्पना सोसायटी निवासी 40 वर्षीय गिरधर बिष्ट को 17 मई को मारपीट के एक मामले में जेल भेजा गया था। चार दिन बाद निजी मुचलके पर उनकी रिहाई हुई, लेकिन 21 मई को जेल से बाहर आने के बाद वह लापता हो गए। परिवार ने गुमशुदगी दर्ज कराई थी। 12 जून को मसूरी नहर से उनका शव बरामद हुआ। प्रारंभिक पोस्टमार्टम में मौत का कारण डूबना बताया गया, हालांकि परिजनों की मांग पर चिकित्सकों के पैनल से दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया। मृतक की मां देवकी देवी ने आरोप लगाया कि बेटे को पहले परेशान किया गया, फिर मारपीट के बाद उसके खिलाफ ही कार्रवाई कर जेल भेजा गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जेल में उससे पैसों की मांग की गई थी। मामले में देवकी देवी की तहरीर के आधार पर मसूरी थाने में सुनील, धर्मेंद्र, शैलेश, सोसायटी निवासी रविंद्र त्यागी, मेट्रो में कार्यरत जवान और एक महिला व एक अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की जांच जारी है।


