13 जून का संपादकीय 'शांति कितनी पास' पढ़ा। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबर पश्चिम एशिया ही नहीं पूरी दुनिया के लिए राहत का संकेत है। लेकिन ट्रंप की तुनक मिजाजी चिंता पैदा करती है। प्रस्तावित मसौदे में लेबनान सहित विभिन्न मोर्चों पर संघर्ष समाप्त करने की बात महत्वपूर्ण है, क्योंकि क्षेत्रीय शांति तभी संभव है जब सभी पक्ष संयम बरतें। हालांकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और इस्राइल की सुरक्षा संबंधी चिंताएं अब भी बड़ी बाधाएं हैं। तेल कीमतों में नरमी और शेयर बाजारों में तेजी ने संकेत दिया है कि दुनिया स्थिरता चाहती है। अब जरूरी है कि ट्रंप इस पहल को धैर्य पूर्वक स्थायी शांति में बदलें।
अमृतलाल मारू, ईमेल से


