तोड़फोड़ के विरोध में निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन

नवभारतटाइम्स.कॉम

फरीदाबाद में नेहरू कॉलोनी के सैकड़ों घरों पर हुई तोड़फोड़ के खिलाफ लोगों ने नगर निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। लोगों ने इस कार्रवाई को गैरकानूनी बताते हुए विस्थापितों के पुनर्वास और मुआवजे की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बिना नोटिस के रात में घरों को ध्वस्त किया गया।

faridabad strong protest at nigam headquarters against demolition in nehru colony demand for rehabilitation and compensation

n NBT न्यूज, फरीदाबाद

नेहरू कॉलोनी में हुई तोड़फोड़ के विरोध में लोगों ने सोमवार को नगर निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन नेहरू कॉलोनी बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में किया गया। सीटू व साथ अन्य कर्मचारी संगठनों ने भी प्रदर्शन को अपना सहयोग दिया। इस दौरान नेहरू कॉलोनी में तोड़फोड़ को गैरकानूनी बताते हुए विस्थापित लोगों को पुनर्वास व मुआवजा देने की मांग रखी गई। प्रदर्शन की अध्यक्षता सुधा पाल, बिजेंद्र सिंह व नवल सिंह ने की। इस दौरान सीटू के प्रदेश महासचिव जय भगवान, जिला सचिव वीरेंद्र डंगवाल, जनवादी महिला समिति की प्रदेश अध्यक्ष सविता ने लोगों को संबोधित किया।

प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए पूर्व मंत्री महेंद्र प्रताप के पुत्र विवेक प्रताप सिंह भी पहुंचे और लोगों को संबोधित किया। संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा और अन्य नेताओं के नेतृत्व में नगर निगम के जॉइंट कमिश्नर से मिलकर एक मांग पत्र मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया। मौके पर वक्ताओं ने कहा कि फरीदाबाद नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा 60 साल से भी अधिक समय से बसी नेहरू कॉलोनी में सैकड़ों घरों और धार्मिक स्थलों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्रवाई रात को की गई, जब लोग घरों में सो रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन घरों पर बुलडोजर चला उनके मालिकों को घर खाली करने के लिए पहले कोई नोटिस तक नहीं दिए गए। इस कॉलोनी में रहने वाले लोगों के राशन कार्ड, आधार कार्ड, बिजली के मीटर, वोटर कार्ड हैं, फिर क्यों इस प्रकार की कार्रवाई की जा रही है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां कानून का राज है। देश या प्रदेश सरकार अगर किसी प्रॉजेक्ट के लिए जमीन का अधिग्रहण करती है तो उसके लिए भी एक तय प्रक्रिया है, लेकिन फरीदाबाद में कानूनी नियमों की अवहेलना की जा रही है।

29 व 30 मई तो हुई थी तोड़फोड़ की कार्रवाई

नेहरू काॅलोनी के 200 से ज्यादा घरों को 29 व 30 मई को तोड़ा गया, लेकिन नोटिस दो जून को नगर निगम कमिश्नर की तरफ से भेजा गया। जब तक मांगे पूरी नहीं होती, तब तक हर रोज नगर निगम के कमिश्नर के कार्यालय पर धरना देने का फैसला लिया गया। प्रदर्शन के दौरान ज्ञापन के माध्यम से तोड़फोड़ की कार्रवई पर आगे के लिए रोक लगाने, तोड़े गए मकानों व दुकानों के लिए मुआवजा देने आदि की मांग की गई है।

रेकमेंडेड खबरें