n NBT रिपोर्ट, गुड़गांव
देश के बड़े औद्योगिक शहर गुड़गांव में बिजली आपूर्ति की अनियमितता और उद्योगों को डीजल उपलब्ध कराने पर लगी पाबंदियों से उद्यमी परेशान हैं। औद्योगिक संगठनों का कहना है कि 20 हजार से अधिक इंडस्ट्रियल यूनिट्स प्रभावित हो रही हैं। अधिकतर इंडस्ट्रियल एरिया में बिजली आपूर्ति बाधित हो रही है। ऐसे में डीजल जनरेटर ही विकल्प बचता है। यदि बिजली कटौती के साथ डीजल की उपलब्धता भी प्रभावित होगी तो उत्पादन बनाए रखना कठिन हो जाएगा। प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन दीपक मैनी का कहना है कि पेट्रोल पंप जेरिकैन या अन्य कंटेनरों में डीजल देने से परहेज कर रहे हैं। इससे उन इकाइयों की परेशानी बढ़ गई है जो बिजली बाधित होने पर बैकअप के लिए डीजल जनरेटर का उपयोग करती हैं। उनका कहना है कि उत्पादन रुकने से समय पर आपूर्ति प्रभावित होती है और कई बार श्रमिकों को काम न होने के कारण वापस भेजना पड़ रहा है। गुड़गांव चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के जनरल सेक्रेटरी एसके आहुजा ने कहा कि डीजल की खुदरा बिक्री पर पूर्ण पाबंदी व्यावहारिक नहीं है।
'पहले तैयार करें विकल्प, फिर लगाएं प्रतिबंध' : अलग-अलग औद्योगिक संगठनों का कहना है कि यदि सरकार डीजल उपयोग को सीमित करना चाहती है तो इसके साथ वैकल्पिक व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनका सुझाव है कि या तो 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई जाए या उद्योगों को उनकी वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप सीमित मात्रा में डीजल खरीदने की अनुमति दी जाए। हरियाणा इंडस्ट्रियल असोसिएशन के चेयरमैन किशन कपूर का कहना है कि खुदरा डीजल पर प्रतिबंध से गुड़गांव जैसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात केंद्र में उत्पादन की निरंतरता प्रभावित हो रही है।

