उद्घाटन के 172 दिन बाद भी अधूरा मंझावली-ग्रेनो रास्ता

नवभारतटाइम्स.कॉम

मंझावली से ग्रेटर नोएडा को जोड़ने वाला अटल मार्ग उद्घाटन के 172 दिन बाद भी अधूरा है। यह मार्ग अब एक जानलेवा गड्ढों वाला रास्ता बन गया है। हाल ही में एक अस्पताल प्रबंधक की गड्ढे में गिरकर मौत हो गई। इसके बावजूद विभाग ने कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं किए हैं।

manjawali greno road incomplete even after 172 days of inauguration people losing lives in potholes

n विवेक कुमार, दनकौर

हरियाणा के मंझावली पुल से ग्रेटर नोएडा को जोड़ने वाला वह रास्ता, जिसे क्षेत्र की लाइफलाइन और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का प्रवेश द्वार कहा जा रहा था, आज एक जानलेवा डेथ ट्रैप में तब्दील हो चुका है। बड़े तामझाम के साथ हुए उद्घाटन के 172 दिन बीत जाने के बाद भी यह मार्ग अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। विडंबना यह है कि पिछले रविवार की रात इसी मार्ग पर एक गहरे गड्ढे में गिरकर हरियाणा निवासी अस्पताल मैनेजर अतुल जोशी की दर्दनाक मौत हो गई, लेकिन इस त्रासदी के बाद भी संबंधित विभाग ने न तो अपनी सुस्ती त्यागी है और न ही मौके पर कोई सुरक्षा इंतजाम किए हैं।

मौत के गड्ढे अभी भी खुले

एनबीटी की टीम ने मंगलवार को जब मंझावली पुल से ग्रेटर नोएडा की ओर आने वाले इस कच्चे-पक्के रास्ते का जायजा लिया, तो स्थितियां डरावनी मिलीं। जिस गहरे गड्ढे ने अतुल जोशी की जान ली, वह आज भी बिना किसी बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड के खुला पड़ा है। रात के अंधेरे में दूर से यह गड्ढा दिखाई नहीं देता, जो किसी भी वाहन चालक के लिए काल साबित हो सकता है। पूरे रास्ते पर बड़ी मात्रा में बालू और बारीक रेत फैली हुई है, जिससे बाइक और स्कूटर सवार हर पल फिसल रहे हैं। सबसे ज्यादा खतरनाक वह हिस्सा है जहां सड़क पुल पर चढ़ती है; यहां जमीन और पुल के बीच ऊंचाई का अंतर इतना अधिक है कि तेज रफ्तार वाहन अनियंत्रित होकर पलट रहे हैं।

..तब दावों की लगी थी झड़ी

इस मार्ग का उद्घाटन 26 दिसंबर 2025 को जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह, सांसद डॉ. महेश शर्मा और हरियाणा के मंत्री राजेश नागर ने किया था। उस ऐतिहासिक पल पर इस रास्ते का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर अटल मार्ग रखा गया था। उस समय दावों की झड़ी लगा दी गई थी कि यह 66 करोड़ रुपये का प्रॉजेक्ट रिकॉर्ड समय में पूरा होगा और दिल्ली-एनसीआर की दूरी कम कर देगा। लेकिन आज जमीनी हकीकत यह है कि न तो निर्माण कार्य गति पकड़ रहा है और न ही यहां से गुजरने वाले हजारों लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।