बदलते लाइफस्टाइल से कॉलेज के छात्रों पर बढ़ रहा मानसिक दबाव

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कॉलेज छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है। बदलती लाइफस्टाइल और सोशल मीडिया इसका कारण बन रहे हैं। एक स्टडी में कई छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य संकट और खुद को नुकसान पहुंचाने के लक्षण मिले हैं। छात्राओं में यह खतरा अधिक देखा गया है। पढ़ाई, भविष्य और सामाजिक अपेक्षाओं का दबाव युवाओं को प्रभावित कर रहा है।

rising mental pressure on college students impact of changing lifestyle and social media

n दीपाली श्रीवास्तव गुड़गांव

तेजी से बदलती लाइफस्टाइल और सोशल मीडिया पर दिखने वाली परफेक्ट लाइफ के पीछे कई कॉलेज स्टूडेंट्स पर मानसिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके संकेत जिले में हुई एक स्टडी ने दिए हैं। स्टडी बताती है कि कॉलेज कैंपस की सामान्य दिखने वाली जिंदगी में कई युवा मानसिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं।

स्टडी में शामिल हर दूसरे स्टूडेंट में मानसिक स्वास्थ्य संकट और स्यूसाइडल टेंडेसी के लक्षण दिखे हैं। यह स्टडी इंटरनैशनल जर्नल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंस स्टडीज (IJHSSS) में प्रकाशित हुई है। शोध का नेतृत्व एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ क्लिनिकल साइकोलॉजी के असोसिएट प्रफेसर डॉ. मुस्तफा नदीम किरमानी ने किया और सेक्टर-31 पॉलीक्लिनिक के क्लिनिकल साइकोलजिस्ट डॉ. सचिन खटाना ने सहयोग दिया। अंतिम विश्लेषण 144 स्टूडेंट्स पर आधारित रहा। इनमें 122 पोस्टग्रैजुएट और 22 अंडरग्रैजुएट स्टूडेंट्स शामिल थे। प्रतिभागियों की औसत उम्र 23 से 24 साल रही। मूल्यांकन के लिए आस्क स्यूसाइड स्क्रीनिंग प्रश्न (ASQ) टूल का इस्तेमाल किया गया। स्टडी में 55.5% प्रतिभागियों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े जोखिम मिले। कुछ ने भावनात्मक संकट और कुछ ने खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे विचार आने की बात कही। कुछ ने आत्महत्या के प्रयास से जुड़े अनुभवों के बारे में भी बताया।

एक्सपर्ट्स के अनुसार ये संकेत भले ही हर शख्स को खतरे में न बताएं, लेकिन इन्हें शुरुआती चेतावनी मान गंभीरता से लेना जरूरी है।

छात्राओं में खतरे के संकेत ज्यादा : अध्ययन में जोखिम संकेतों वाले समूह में छात्राओं की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत अधिक दर्ज की गई। शोधकर्ताओं का कहना है कि इसके पीछे सामाजिक अपेक्षाएं, भावनात्मक दबाव और तनाव व्यक्त करने के अलग तरीके जैसे कई कारण हो सकते हैं। हालांकि इसे किसी समूह की कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

आखिर युवाओं को किस ओर धकेल रहा दबाव?

विशेषज्ञों के अनुसार युवाओं में बढ़ता मानसिक दबाव किसी एक वजह का परिणाम नहीं है बल्कि कई सामाजिक, शैक्षणिक और व्यक्तिगत कारकों का संयुक्त असर है।

पढ़ाई में लगातार बेहतर प्रदर्शन की अपेक्षा, अच्छे अंक और प्लेसमेंट हासिल करने की होड़, सोशल मीडिया पर दूसरों से तुलना, रिश्तों और पारिवारिक अपेक्षाओं का दबाव, भविष्य को लेकर अनिश्चितता और जरूरत होने पर भी मदद मांगने में झिझक ये सभी कारण मिलकर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं।