nNBT रिपोर्ट
दुबई में प्रॉपर्टी खरीदने वाले कुछ भारतीय जांच के दायरे में आ गए हैं। आर्थिक अपराधों की जांच करने वाली एजेंसी ED ने ऐसे लोगों को नोटिस भेजना शुरू किया है, जिन्होंने इंटरनैशनल क्रेडिट कार्ड से वहां घर खरीदने के लिए पेमेंट किया था।
सूत्रों के मुताबिक, फरवरी में कई लोगों को नोटिस भेजे गए हैं। इनसे पूछा गया है कि प्रॉपर्टी खरीदने के लिए पैसा कहां से आया और किस तरीके से भुगतान किया गया। कई लोगों ने दुबई जाकर कार्ड स्वाइप किया या ऑनलाइन पेमेंट लिंक के जरिए रकम चुकाई।
कहां हुई गलती?: असल समस्या पेमेंट के तरीके में है। क्रेडिट कार्ड से किया गया भुगतान एक तरह का कर्ज (loan) माना जाता है। भारतीय नियमों के अनुसार, विदेश में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए उधार लेकर पैसा भेजना मंजूर नहीं है। यानी पैसा आपकी अपनी कमाई का होना चाहिए, न कि उधार का।
क्या कहते हैं RBI के नियम?: RBI की एलआरएस (Liberalised Remittance Scheme) के तहत कोई भी भारतीय विदेश में प्रॉपर्टी खरीदने और भारत से ऑनलाइन खरीदारी करने के लिए साल में अधिकतम 2.5 लाख डॉलर विदेश भेज सकता है। लेकिन यह पैसा बैंकिंग चैनल से और टैक्स चुकाने के बाद ही भेजा जा सकता है। क्रेडिट कार्ड इस नियम के तहत सही माध्यम नहीं माना जाता।
अब क्या करें फंसे हुए लोग?: जिन लोगों को नोटिस मिला है, उन्हें लेन-देन को सही करना होगा, जिसके लिए नया पैसा लगाना पड़ सकता है। नहीं तो प्रॉपर्टी बेचने की नौबत भी आ सकती है, खासकर जब दुबई का बाजार अभी कमजोर है। ऐसे मामलों में लोग कंपाउंडिंग यानी गलती मानकर जुर्माना देकर मामला खत्म करने का रास्ता अपना सकते हैं। इसमें आम तौर पर ₹2 लाख तक का जुर्माना लग सकता है, लेकिन इसके लिए ईडी की मंजूरी जरूरी होती है। कुछ मामलों में खरीदारों को बैंक के जरिए दोबारा भुगतान करना पड़ सकता है और पहले दिया गया पैसा वापस मंगवाना पड़ सकता है।



