गंगा में इफ्तार करने वाले युवकों की ज़मानत खारिज़

नवभारतटाइम्स.कॉम

वाराणसी की अदालत ने गंगा में नाव पर इफ्तार के दौरान मांसाहार करने वाले युवकों की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। बचाव पक्ष ने मटन-चिकन की बरामदगी न होने और साजिश का आरोप लगाया। अभियोजन पक्ष ने अपराध को गंभीर बताया। अदालत ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए जमानत का कोई ठोस आधार नहीं पाया।

गंगा में इफ्तार करने वाले युवकों की ज़मानत खारिज़

NBT न्यूज, वाराणसी: वाराणसी के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमित कुमार यादव की अदालत ने गंगा में नाव पर इफ्तार पार्टी के दौरान मांसाहर का सेवन करने के मामले के आरोपियों की जमानत अर्जी सोमवार को सुनवाई के बाद खारिज कर दी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने जमानत अर्जी पर बहस करते हुए कहा कि आरोपियों के पास से मटन-चिकन की कोई बरामदगी नहीं हुई है और न ही विडियो में इसकी कोई फोटो है। अभियुक्त निर्दोष हैं और काननू का सम्माान करने वाले नागरिक हैं। उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है। जबकि सहायक अभियोजन अधिकारी दीपक कुमार ने जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए कहा कि नाव को हाइजैक और नाविक का अपहरण करने के साथ गंगा में इफ्तार पार्टी के दौरान मांसाहार का सेवन करने का अपराध गंभीर प्रकृति का है, जिसमें दस वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। इसके साथ ही वादी मुकदमा को धमकी दिए जाने का मुकदमा सिगरा थाने में दर्ज किया गया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए जमानत देने का कोई ठोस आधार नहीं बनता।