जीवन को सदा गतिमान रखने की शक्ति हैं दुर्गा

Contributed byआनंदमूर्ति गुरुमां|नवभारतटाइम्स.कॉम

जीवन को गतिमान रखने वाली शक्ति दुर्गा हैं। यह शक्ति संपूर्ण सृष्टि में व्याप्त है। मनुष्य के जीवन की हर क्रिया इसी शक्ति से संचालित होती है। यह शक्ति केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति के हर रूप में मौजूद है। देवी जीवन और ब्रह्मांड की मूल चेतना का प्रतीक हैं।

durga the secret of the supreme power that keeps life moving

‘गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वं एका भवानि...’ यानी हे मां भवानी, आप ही मेरी एकमात्र गति (सहारा) हैं। न मेरा कोई पिता है, न माता, न भाई, न पुत्र, न पुत्री, न ही कोई आश्रय। यह अटूट विश्वास दर्शाता है कि कठिन हालात- जल, अग्नि, पर्वत, शत्रु के बीच केवल मां ही रक्षा कर सकती हैं। यह स्तोत्र देवी की शरण में शरणागति का प्रतीक है, जो आमतौर पर नवरात्र में पढ़ा जाता है। यह पंक्ति हमें उस परमशक्ति की ओर संकेत करती है, जो समस्त सृष्टि की गति और आधार है।

पूरी दुनिया में ईश्वर को पिता के रूप में माना गया है, जबकि भारत की ऋषि-परंपरा ने उसे माता के रूप में भी पूरी श्रद्धा और भाव के साथ स्वीकार किया। यह सोच सृष्टि में निर्माण, संचालन और परिवर्तन की शक्ति है। मनुष्य के जीवन में जो भी खोज या ज्ञान विकसित हुआ, वह इसी शक्ति का परिणाम है। यह संपूर्ण सृष्टि - वनस्पतियों, जीव-जंतुओं, ग्रह-नक्षत्रों और प्रकृति के हर रूप में मौजूद है। विविधता से भरी इस सृष्टि के पीछे जो व्यापक चेतना कार्य कर रही है, वही चित्त शक्ति है। यानी मन की वह आंतरिक शक्ति, जो विचार करने, अनुभव करने, निर्णय लेने और आत्मचेतना को जागृत करने की क्षमता देती है।

हमारे ऋषियों ने इसको सरल भाषा में ‘देवी’ कहा है। हमारे शरीर की प्रत्येक क्रिया- हृदय की धड़कन, श्वास-प्रश्वास, पाचन, इंद्रियों का कार्य - सब उसी शक्ति से संचालित होते हैं, जबकि हमें इसका प्रत्यक्ष ज्ञान भी नहीं होता। मन के स्तर पर भी यही शक्ति विचार, भावना, सुख-दुख और इच्छाओं के रूप में प्रकट होती है। हम इन अनुभवों को महसूस तो करते हैं, पर इनके संचालन का मूल स्रोत नहीं जानते। यही अज्ञात, परंतु सर्वव्यापी ऊर्जा ‘दुर्गा’ हैं- जीवन को गतिमान रखने वाली शक्ति। दुर्गा सिर्फ मंदिरों तक सीमित नहीं, वह संपूर्ण जीवन-प्रवाह की प्रतीक हैं। शरीर में रक्तसंचार, प्रकृति में फूलों की सुगंध, सूर्य का तेज, चंद्रमा की शीतलता - ये सभी उसी शक्ति के विविध रूप हैं। इस प्रकार, देवी केवल पूजा का विषय नहीं, जीवन और ब्रह्मांड की मूल चेतना का प्रतीक हैं।