NBT रिपोर्ट, मुंबई/दिल्ली
मिडल ईस्ट में चल रही जंग के बीच सोने-चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट जारी है। सोमवार को दिल्ली में सोना ₹9,050 गिरकर ₹1.43 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि चांदी ₹10,500 टूटकर ₹2.30 लाख प्रति किलो हो गई। ऑल इंडिया सर्राफा असोसिएशन के अनुसार, सोने में करीब 6% और चांदी में 4.36% की गिरावट दर्ज हुई। सबसे अहम बात यह है कि पिछले हफ्ते सोने की कीमतों में 10% से ज्यादा की गिरावट आई, जो करीब 40 साल से भी ज्यादा समय में सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। यह रेकॉर्ड गिरावट बाजार में बढ़ती अनिश्चितता को दिखाती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें ऊपर गई हैं, जिससे महंगाई (Inflation) बढ़ने का डर है। इसी वजह से ब्याज दरें बढ़ने की आशंका भी मजबूत हुई है। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश की मांग घट जाती है। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड (सरकारी बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न) बढ़ने से भी सोने-चांदी पर दबाव पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना करीब 5% गिरकर 4,263 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी में भी 6% से ज्यादा की गिरावट आई। जानकारों का कहना है कि फिलहाल दबाव बना रह सकता है, लेकिन लंबे समय में सोने की मांग फिर मजबूत हो सकती है, खासकर जब हालात सामान्य होंगे।
कच्चे तेल की कीमतें घटती दिख रही है। ट्रंप के बयान के बाद ब्रेंट क्रूड के एक बैरल की कीमत 10.5% गिरकर $100.46 हो गई, जो पिछले हफ्ते एक समय लगभग $120 थी
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
सोने की कीमतों में आई हाल की गिरावट को जानकार बड़ी गिरावट नहीं, बल्कि सामान्य करेक्शन यानी अस्थायी गिरावट मान रहे हैं। उनके मुताबिक, निवेशकों को घबराकर सोना बेचने से बचना चाहिए। इसके बजाय इस गिरावट को खरीदारी के मौके के रूप में देखना बेहतर हो सकता है, खासकर SIP के जरिए। छोटी अवधि में उतार-चढ़ाव रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि में सोने का नजरिया अब भी सकारात्मक है।



