nNBT रिपोर्ट, मुंबई
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को गिरावट का सिलसिला फिर शुरू हो गया, जिसमें इक्विटी बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 2% से ज्यादा की गिरावट आई। पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त होने के कोई संकेत नहीं होने से ग्लोबल बाजारों के कमजोर रुख से घरेलू बाजार में गिरावट रही।
सेंसेक्स 1,837 अंक, यानी 2.46% गिरकर 72,696 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 602 अंक, यानी 2.6% गिरकर 22,512 पर आ गया। BSE 150 Midcap और BSE 250 Smallcap इंडेक्स दोनों में 4% की भारी गिरावट आई। निवेशकों को एक ही सेशन में करीब 14 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, क्योंकि BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन शुक्रवार के ₹429 लाख करोड़ से गिरकर 415 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। बाजार में वॉलैटिलिटी इतनी ज्यादा थी कि घरेलू बाज़ार में उतार-चढ़ाव का पैमाना, India VIX, 22.4% बढ़कर 20.98 पर पहुंच गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, विदेशी संस्थागत निवेशकों की निरंतर पूंजी निकासी और रुपये की विनिमय दर में गिरावट को देखते हुए निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं।
क्या होगा असर?
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशल सर्विसेज के मुताबिक, भारत अपनी ऊर्जा जरूरत का करीब 80% आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से देश की ग्रोथ, चालू खाता घाटा (CAD, देश का विदेशी लेन-देन बैलेंस), महंगाई, रुपये की कीमत और सरकारी खर्च पर असर पड़ता है। कुल असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इसका बोझ आम लोगों तक कितना पहुंचता है और सरकार टैक्स, सब्सिडी और ईंधन कीमतों को कैसे संभालती है।



