टीबी से लड़ाई में भारत ने पलटी बाज़ी

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भारत टीबी को खत्म करने की दिशा में एक नई मुहिम शुरू कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में टीबी की घटनाओं और मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है। यह सफलता जन-भागीदारी और विज्ञान, प्रणाली व समाज के एक साथ काम करने का प्रमाण है। युवाओं की भागीदारी और उन्नत तकनीकें इस लड़ाई को और मजबूत कर रही हैं।

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आज जब देश एक और टीबी मुक्त भारत अभियान - 100 दिनों की मुहिम शुरू कर रहा है, तब मैं तपेदिक (टीबी) को खत्म करने की हमारी यात्रा को अत्यधिक गर्व और नई उम्मीद के साथ देखता हूं। हाल के वर्षों में भारत की टीबी के खिलाफ प्रतिक्रिया अद्वितीय रही। यह जन-भागीदारी पर आधारित है और इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से प्रेरित सामूहिक जिम्मेदारी की भावना समाहित है। मिशन इंद्रधनुष जैसी प्रमुख पहलों की सफलता को बढ़ावा देकर और सामुदायिक स्तर पर 'स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार' के संदेश को मजबूत करके, यह सम्पूर्ण समाज-आधारित दृष्टिकोण विभिन्न क्षेत्रों में अपनी ताकत साबित कर चुका है। दिसंबर 2024 में शुरू किए गए 100 दिन के गहन टीबी मुक्त भारत अभियान के अनुभव ने जन-शक्ति में हमारे विश्वास को और मजबूत किया है।

जन आंदोलन । चिकित्सा अभियान के रूप में शुरू हुई यह मुहिम अब जन आंदोलन बन गई है। परिणाम स्वयं बोलते हैं - भारत में 2015 से टीबी की घटनाओं में 21% और मृत्यु दर में 25% की गिरावट आई है। यह दिखाता है कि जब विज्ञान, प्रणाली और समाज साथ काम करते हैं, तो क्या हासिल किया जा सकता है।

युवाओं की भागीदारी । भारत की तपेदिक के खिलाफ लड़ाई सामूहिक भागीदारी की ताकत को दर्शाती है। केंद्रीय मंत्रालयों से लेकर ग्राम पंचायतों तक, डॉक्टरों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक, हर कोई शामिल है। यहां तक कि उपचार पूरा कर चुके मरीज भी टीबी विजेताओं के रूप में दूसरों का समर्थन कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने 25 अन्य मंत्रालयों, सभी पंचायती राज संस्थानों और सामुदायिक संगठनों की विशेषज्ञता, नेटवर्क और बुनियादी ढांचे को एकजुट करने के लिए उनके साथ हाथ मिलाया है। 'मेरा भारत' कार्यक्रम के माध्यम के युवाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी भी इतनी ही प्रेरणादायक रही है। दो लाख से अधिक मेरा भारत स्वयंसेवकों ने टीबी मरीजों की मदद के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है।

20 करोड़ टेस्ट । हमारी रणनीति नए साक्ष्यों और उभरती चुनौतियों के जवाब में लगातार विकसित हुई है। राष्ट्रीय टीबी प्रसार सर्वेक्षण से पता चला कि आधे मरीजों में सामान्य लक्षण नहीं दिखते। इसके बाद बगैर-लक्षण वाली संवेदनशील आबादी में जांच बढ़ी। AI सक्षम छोटी एक्स-रे मशीनें और अडवांस्ड टेस्टिंग टेक्निक से लैस वाहनों से जांच आसान हुई। 20 करोड़ से अधिक लोगों के टेस्ट में 32.65 लाख में टीबी के मामले पाए गए। 10.9 लाख केस बगैर लक्षण वाले थे।

आगे का लक्ष्य । अगले 100 दिन के अभियान में 3000 से अधिक AI संचालित एक्स-रे उपकरणों और अगली पीढ़ी की डायग्नोस्टिक मशीनों को तैनात किया जाएगा। डेटा पर आधारित टूल यह पहचानने में मदद करेंगे कि कौन-से गांव और शहर के इलाके ज्यादा जोखिम में हैं, ताकि वहां जांच पर ज्यादा ध्यान देकर बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकें। भारत का तेजी से शहरीकरण हो रहा है। घनी आबादी और कमजोर समुदायों को देखते हुए यदि जांच और देखभाल को मजबूत नहीं किया गया तो यह रोग अनजाने में फैल सकता है। इसलिए हम उच्च जोखिम वाले शहरी क्षेत्रों जैसे अनौपचारिक बस्तियों, प्रवासी श्रमिक समूहों और अन्य कमजोर आबादी पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

आगे का रास्ता । जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, कार्य स्पष्ट होता जा रहा है - हासिल की गई गति को बनाए रखना, साथ ही इसे और भी अधिक तेजी से आगे बढ़ाना। जब हम साथ मिलकर प्रयास करते हैं, तो हमेशा सफल होते हैं। पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने कोविड-19 के खिलाफ रिकॉर्ड समय में एक अरब से अधिक लोगों का टीकाकरण किया। 'मेड इन इंडिया' विकास की रणनीति के साथ हम आशा से निश्चितता की ओर बढ़े हैं। हम इस साझा मिशन में हर नागरिक, संस्था और युवा मंच को शामिल करके प्रारंभिक जांच को बढ़ाना, निदान तक पहुंच का विस्तार करना जारी रखेंगे।

क्षमता का प्रमाण । टीबी के खिलाफ भारत का अभियान सिर्फ एक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयास नहीं है। यह एक जन-सहभागिता है - उद्देश्य के लिए एकजुट होने की क्षमता का प्रमाण है। यदि हम साथ हैं, तो यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि अगली पीढ़ी टीबी को केवल इतिहास के एक अध्याय के रूप में जानेगी, न कि उनके जीवन की वास्तविकता के रूप में। यही वह भारत है जिसके लिए हम काम कर रहे हैं। इस भारत को हम मिलकर बनाएंगे।

(लेखक केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री व रसायन और उर्वरक मंत्री हैं)