n दीपाली श्रीवास्तव, गुड़गांव
शहर में ट्यूबरकुलोसिस (टीबी ) के मामले खामोशी से लेकिन तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक शहर में अभी 9 हजार से ज्यादा एक्टिव केस हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानन है कि असल संख्या इससे ज्यादा हो सकती है। कारण कई संक्रमित लोग अब भी बिना जांच के खुलेआम घूम रहे हैं और अनजाने में दूसरों को संक्रमित कर रहे हैं। चिंता की बात यह है कि ये बीमारी अब बुजुर्गों के साथ ही युवाओं को भी चपेट में ले रही है। 45 साल से कम उम्र के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग और रेड क्रॉस सोसायटी के अनुसार, मामलों में बढ़ोतरी का बड़ा कारण स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ना है। पहले भी मरीज थे लेकिन उन्हें बीमारी का पता नहीं चलता था। 2025 से शुरू हुई ऑन-द-स्पॉट पोर्टेबल एक्स-रे जांच के बाद बड़ी संख्या में केस सामने आ रहे हैं।
रेड क्रॉस सोसायटी के जिला कोऑर्डिनेटर रोहिताश शर्मा बताते हैं कि हर महीने रेड क्रॉस की तरफ से 4 से 5 और स्वास्थ्य विभाग की तरफ से लगभग 20 से ज्यादा स्क्रीनिंग कैंप लगाए जा रहे हैं। इस साल रेड क्रॉस के कैंप बढ़ाकर 15 करने की योजना है। जितनी ज्यादा जांच होगी उतनी जल्दी मरीज सामने आएंगे और इलाज शुरू हो सकेगा। समय रहते इलाज हो जाए तो इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
क्या कहते हैं अधिकारी : हरियाणा हेल्थ सर्विसेज के डायरेक्टर डॉ. ब्रह्मदीप ने बताया कि शहर में टीबी की रोकथाम के लिए मिशन मोड पर टीम काम कर रही है। लगातार स्क्रीनिंग की जा रही है और ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच पहुंच बनाने की कोशिश है। जिससे डिटेक्शन एट होम किया जा सके। लोगों को टीवी प्रीवेंटिव थेरेपी देने के साथ ही हर मरीज को अच्छी से अच्छी दवाई मिले उसके लिए कस्टमाइज दवाइया उपलब्ध है। उन्होंने कहा अभी और जागरूकता की जरूरत है। मरीजों को सही खानपान के लिए लोग टीबी मित्र बनकर आगे आए।



