डॉग बाइट के बढ़े मामले, 3 माह में लगी 11 हज़ार ARV

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गुड़गांव में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ रहा है। पिछले तीन महीनों में 11 हजार से अधिक लोगों को एंटी रैबीज वैक्सीन लगी है। यह समस्या सार्वजनिक सुरक्षा के लिए बड़ा संकट बन गई है। प्रशासन की सुस्ती और नसबंदी की धीमी रफ्तार इसके मुख्य कारण हैं। खुले में खाना डालने से भी कुत्तों के झुंड बढ़ रहे हैं।

dog bite terror in gurgaon over 11 thousand people vaccinated with arv in 3 months major public safety crisis

n दीपाली श्रीवास्तव, गुड़गांव

गुड़गांव में स्ट्रे डॉग का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि डॉग बाइट अब सिर्फ एक मेडिकल इश्यू ही नहीं, बल्कि पब्लिक सेफ्टी का बड़ा संकट बन गया है। सेक्टर-10 स्थित सिविल हॉस्पिटल के आंकड़े सिस्टम की पोल खोल रहे हैं। सिर्फ सरकारी अस्पताल में तीन महीने के आंकड़े देखें तो जनवरी से 28 मार्च तक 11 हजार 831 एंटी रैबीज वैक्सिन (ARV) लगाई गई हैं। यानी हर दिन 130 से ज्यादा लोग डॉग के हमले का शिकार हो रहे हैं। लोगों की ओर से रोजाना शिकायतें की जाती हैं, लेकिन प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

शहर में कहां है सबसे ज्यादा खतरा: शहर में सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका सेक्टर-4, 7, 9 और 10, सदर बाजार और आसपास की घनी आबादी, झाड़सा गांव, चक्करपुर, पालम विहार हैं। इन इलाकों में डॉग के झुंड खुलेआम सड़कों पर घूमते रहते हैं और बच्चों, बुजुर्गों व अकेले राहगीरों को अपना निशाना बनाते हैं।

क्यों फेल हो रहा सिस्टम: जानकारों के मुताबिक, शहर में डॉग बाइट बढ़ने की बड़ी वजह सिस्टम की सुस्ती है। नसबंदी की रफ्तार धीमी है, जबकि शेल्टर और स्ट्रे मैनेजमेंट की कमी है। लोगों की शिकायतों पर समय पर कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे समस्या लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही खुले में खाना डालने की बढ़ती प्रवृत्ति भी आवारा कुत्तों के झुंड को बढ़ावा दे रही है, जो हमलों की बड़ी वजह बन रही है।

कैसे थमेगा डॉग्स का आतंक: विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त और सुनियोजित रणनीति के हालात नहीं सुधरेंगे। जरूरी कदम बड़े स्तर पर डॉग नसबंदी और एंटी रैबीज वैक्सिनेशन ड्राइव है। हॉटस्पॉट वाले इलाकों में स्पेशल कंट्रोल अभियान के साथ ही संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए।