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भिवंडी की कामवारी नदी गंभीर प्रदूषण और अतिक्रमण से जूझ रही है। शहर का गंदा पानी और औद्योगिक रसायन नदी को दूषित कर रहे हैं। इससे जलचर जीव नष्ट हो रहे हैं और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोग नदी की बदहाली पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

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n विजय कुमार सिंह, भिवंडी

भिवंडी की कामवारी नदी की स्थिति प्रदूषण एवं अतिक्रमण के कारण दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। बढ़ते अतिक्रमण और प्रदूषण के कारण नदी का अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया है। पहले इस नदी से खेती की जाती थी, लेकिन अब शहर की सीमा में प्रवेश करते ही नदी का रूप गंदे नाला जैसा हो गया है।

भिवंडी मनपा की अधूरी मलनिस्सारण परियोजनाओं के कारण शहर का गंदा पानी बिना किसी प्रक्रिया के सीधे नदी में छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों तथा शेलार ग्राम पंचायत सीमा में स्थित डाईंग, साइजिंग और केमिकल कंपनियों द्वारा रसायनयुक्त पानी नदी में छोड़ा जा रहा है, जिससे प्रदूषण और बढ़ गया है। इसके कारण जलचर जीव नष्ट हो रहे हैं और नदी में जलकुंभी की मात्रा भी बहुत बढ़ गई है। जलकुंभी पानी में मौजूद ऑक्सीजन को सोख लेती है, जिससे जलचर जीवों के लिए खतरा पैदा हो गया है। दूसरी ओर नदी के किनारे बड़े पैमाने पर अतिक्रमण होने से उसका प्रवाह संकरा हो गया है, जिससे बारिश के मौसम में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

स्थानीय महिला रुमिन फरीद ने बताया कि उनके बचपन में यह नदी पूरी तरह बहती थी। यहां मछली पकड़ने का काम होता था। उन्होंने इसी नदी में तैरना सीखा था, लेकिन अब इसमें पैर रखने से भी डर लगता है। नदी के किनारे की सभी इमारतों का ड्रेनेज बिना किसी प्रक्रिया के सीधे नदी में छोड़ा जा रहा है। वर्षों से सफाई नहीं होने के कारण इसकी हालत बिगड़ गई है। अब मनपा और जिला प्रशासन नदी के संबंध में उपाययोजनाएं शुरू कर रहे हैं, देखते हैं कब तक पूरा होता है।

बता दें कि कामवारी नदी ग्रामीण क्षेत्र से बहते हुए शहर की सीमा से खाड़ी में मिलती है। इस नदी का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र में है| जबकि लगभग 3 किलोमीटर का हिस्सा भिवंडी महानगरपालिका सीमा में आता है। इससे पहले नदी से जलकुंभी हटाने के लिए अभियान चलाया गया था। गंदे पानी के संबंध में भी उपाययोजनाएं की गई हैं। भूमिगत नाला योजना शुरू हो चुकी है, जिससे अन्य जगहों पर जा रहे गंदे पानी को प्रक्रिया के बाद छोड़ा जाएगा। हालांकि, मनपा सफाई विभाग प्रमुख फैसल तातली एवं तहसीलदार अभिजीत खोले से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।