हाई रिस्क जोन पर निगरानी बढ़ा खत्म करेंगे मच्छर का लार्वा

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गुड़गांव में डेंगू के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है। मच्छरों के लार्वा को खत्म करने के लिए हाई रिस्क जोन पर निगरानी बढ़ाई गई है। नगर निगम और जीएमडीए के साथ मिलकर टीमें ऐसे इलाकों की पहचान कर रही हैं जहां मच्छर पनपने की संभावना अधिक है।

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n NBT न्यूज, गुड़गांव

डेंगू के संभावित खतरे को देखते हुए गुड़गांव में स्वास्थ्य विभाग ने इस बार पहले से ही मोर्चा संभाल लिया है। मच्छरों पर नियंत्रण के लिए सोर्स रिडक्शन और हॉटस्पॉट मैपिंग को मुख्य हथियार बनाया गया है। नगर निगम और जीएमडीए के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीमें उन इलाकों की पहचान कर रही हैं, जहां मच्छरों के पैदा होने की संभावना ज्यादा है।

इन्हें हाई रिस्क जोन मानकर कार्रवाई की जा रही है। दरअसल, 2025 में रूटीन सर्वे और जागरूकता अभियान के बाद भी जिले में डेंगू के 64 मामले सामने आये थे और 10 हॉटस्पॉट चिह्नित हुए थे। अब विभाग ने निगरानी व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। अतिरिक्त टीमें तैनात करने के साथ डोर-टू-डोर सर्वे, जागरूकता में बच्चों को शामिल करने और गंबूजिया फिश का सहारा लिया जाएगा। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. जेपी राजलीवाल ने कहा कि सोर्स रिडक्शन का मतलब केवल सफाई नहीं बल्कि मच्छरों की पूरी लाइफ-साइकिल को तोड़ना है। हॉट स्पॉट में मॉनिटरिंग के लिए अधिक टीम लगाई जाएंगी।

नैशनल डेंगू डे पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने साफ किया कि केवल प्लेटलेट्स कम होना डेंगू का संकेत नहीं। मणिपाल हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन व डायबेटोलॉजिस्ट के कंसल्टेंट डॉ. मोहित सरन ने बताया कि डेंगू की पुष्टि हमेशा लक्षणों और जांच के आधार पर ही की जानी चाहिए। वायरल फीवर, टाइफाइड, दवाओं के असर या विटामिन की कमी में भी प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं। इसके साथ ही फोर्टिस के इंटरनल मेडिसिन के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. सतीश कौल ने कहा कि डेंगू में डिहाइड्रेशन बड़ा खतरा है। शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी खतरनाक हो सकती है। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर डॉक्टर से संपर्क करें जिससे गंभीर स्थिति से बचा जा सके।