जांच एजेंसियों का मानना है कि सरकारी भुगतान को कई बैंक खातों के जरिए घुमाकर असली लाभार्थियों तक पहुंचाया गया। कुछ खातों का इस्तेमाल केवल ट्रांजेक्शन रूट बनाने के लिए किया गया, ताकि रकम के स्रोत और गंतव्य को छिपाया जा सके। सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क को किस स्तर तक संरक्षण मिला और क्या सरकारी सिस्टम के भीतर बैठे कुछ प्रभावशाली लोगों की इसमें भूमिका थी।इस केस में कथित ऑडियो और डिजिटल रिकॉर्डिंग को सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है। कुछ रिकॉर्डिंग में फंड ट्रांसफर, बैंक खातों के संचालन और कार्रवाई से बचने के तरीकों पर बातचीत के संकेत मिले हैं। अब सीबीआई इन रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच करा रही है, ताकि यह साफ हो सके कि बातचीत कब हुई, किसके बीच हुई और कथित नेटवर्क कितना बड़ा था।अब 17-A की मंजूरी देकर सरकार ने संकेत दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी। CBI संबंधित अधिकारियों से पूछताछ कर सकती है


