आज के दौर में हम हाथ में स्मार्टफोन रखकर खुद को 'स्मार्ट' समझते हैं। लेकिन क्या इसी वजह से हम असुरक्षित भी होते जा रहे हैं? हाल में एक साइबर सुरक्षा सभा में जो चर्चा सुनी, उसमें हमारी डिजिटल जीवनशैली पर एक कड़वा प्रहार था। जब पुलिसकर्मी साइबर ठगों के पैंतरे समझा रहे थे, बचाव के तरीके बता रहे थे, तब भीड़ से एक आम आवाज उठी। उस व्यक्ति का तर्क सीधा था, अगर आपको लगता है कि आप सर्वज्ञानी नहीं हैं तो कीपैड फोन की शरण में लौट आइए। उसने बताया कि मैं एक समाजसेवी हूं, दिन भर लोगों से वास्ता रहता है लेकिन सारा संपर्क कीपैड फोन से ही होता है। हम 'स्मार्ट' बनने के चक्कर में अपनी सुरक्षा को ताक पर रख देते हैं।
साइबर पुलिसकर्मी ने भी इस बात पर मुहर लगाई कि कीपैड फोन रखने से फ्रॉड का खतरा काफी कम हो जाता है। जिस नंबर से आपका मुख्य बैंक खाता लिंक है, उसे एक पुराने कीपैड फोन में डाल दें। इससे आपका मुख्य धन सुरक्षित रहेगा। हम ऐसे कीपैड फोन ले सकते हैं, जिनमें न थर्ड-पार्टी ऐप्स का झमेला है, न ही आम स्क्रीन शेयरिंग सॉफ्टवेयर के जरिए कोई फोन कंट्रोल कर सकता है। स्मार्टफोन पर आने वाले संदिग्ध लिंक्स पर क्लिक करना आसान है, लेकिन कीपैड फोन की सीमित दुनिया में ये मुश्किल है।
हम गर्व से कहते हैं कि पूरी दुनिया हमारी मुट्ठी में है, लेकिन हकीकत है कि हमारी मुट्ठी स्मार्टफोन ने जकड़ रखी है। जब हम दिन भर स्क्रीन स्क्रॉल करते हैं, तो हम फोन को नहीं चलाते, बल्कि एल्गोरिदम हमें अपनी उंगलियों पर नचाते हैं। हाल में एक ट्रेंड पढ़ा कि जो पीढ़ी इंटरनेट के साथ पैदा हुई, यानी 'जेन-जी', अब वही कीपैड फोन की ओर आकर्षित हो रही है। इसकी वजह सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि डिजिटल डिटॉक्स भी है। लोग अब मानसिक शांति के लिए 'स्मार्ट' होने की दौड़ से बाहर निकलना चाहते हैं। आज हम पूरी तरह स्मार्टफोन नहीं छोड़ सकते, तो अलग रणनीति अपना सकते हैं। बैंक खाते के लिए कीपैड फोन रखें। पैसे जमा करने और खर्च करने के अलग खाते रखें। अब यूपीआई की सुविधा वाले कीपैड फोन भी बाजार में हैं, जो सुरक्षा और जरूरत के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाते हैं। सोशल मीडिया और मनोरंजन के लिए टैबलेट या लैपटॉप हो। कभी-कभी सादगी ही सबसे बड़ा हथियार होती है। जिसे भी स्मार्टफोन की बारीकी से असहजता लगती है, उसके लिए कीपैड फोन को भी अपने पास रखना पीछे की ओर कदम बढ़ाना नहीं है, बल्कि अपनी सुरक्षा की ओर एक समझदारी भरा कदम हो सकता है। आखिर 'स्मार्ट' वही है, जिसका डेटा और दिमाग दोनों उसके वश में हों।


