बोतल में सूरज

Contributed byदिलीप लाल|नवभारतटाइम्स.कॉम

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक नई सन बैटरी बनाई है। यह सूर्य की ऊर्जा को तरल अणुओं में जमा करती है। जरूरत पड़ने पर यह ऊर्जा गर्मी के रूप में मिलती है। इस तकनीक से भारी बैटरियों की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह घरों में पानी गर्म करने और दूरदराज के इलाकों में हीटिंग के काम आ सकती है।

sun in a bottle california scientists develop revolutionary solar energy storage technology

कल्पना कीजिए कि धूप को किसी बोतल में भरकर बाद में इस्तेमाल किया जा सके! कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इसी दिशा में एक नई तकनीक विकसित की है। उन्होंने ऐसी रीचार्जेबल सन बैटरी बनाई है, जो सूर्य की ऊर्जा को तरल अणुओं में लंबे समय तक संचित रख सकती है और जरूरत पड़ने पर उसे गर्मी के रूप में बाहर निकाल सकती है। आम तौर पर सोलर पैनल तभी बिजली बनाते हैं, जब उन पर धूप पड़ रही हो। इसलिए सौर ऊर्जा को सुरक्षित रखने के लिए बड़ी बैटरियों की जरूरत पड़ती है। नई तकनीक की खास बात यह है कि इसमें भारी बैटरियों या बिजली ग्रिड पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं। यह प्रणाली ‘पिरिमिडोन’ नामक एक कार्बनिक अणु पर आधारित है, जिसकी संरचना DNA से प्रेरित है। जब इस अणु पर सूर्य का प्रकाश पड़ता है, तो यह अपनी संरचना बदलकर ऊर्जा को रासायनिक रूप में जमा कर लेता है। बाद में हल्की गर्मी या किसी उत्प्रेरक के संपर्क में आने पर यह फिर अपनी पुरानी अवस्था में लौट आता है और संचित ऊर्जा को ऊष्मा के रूप में छोड़ देता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक घरों में पानी गर्म करने, दूरदराज इलाकों में हीटिंग व्यवस्था और कैंपिंग जैसी जरूरतों में उपयोगी हो सकती है। यदि यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो सौर ऊर्जा को संग्रहित करने और इस्तेमाल करने का तरीका बदल सकता है।