n दीपाली श्रीवास्तव, गुड़गांव
शहर में कॉरपोरेट कल्चर और तेजी से बढ़ते जिम ट्रेंड का असर अब युवाओं की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। दिनभर लैपटॉप के सामने बैठकर काम, देर रात तक ऑफिस का तनाव, कम नींद व फिट रहने के लिए जिम में वर्कआउट जैसी लाइफस्टाइल युवाओं को हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज के खतरे की तरफ ढकेल रही है। विश्व हाइपरटेंशन दिवस पर डॉक्टर्स ने चेतावनी दी है कि 25 से 40 वर्ष की उम्र के युवाओं में हाई बीपी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
तेजी से बॉडी बनाने और फिट दिखने की चाह में युवा बिना डॉक्टर की सलाह प्रोटीन पाउडर, प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट, एनर्जी ड्रिंक्स और स्टेरॉयड का इस्तेमाल कर रहे हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि गुड़गांव जैसे कॉरपोरेट शहर में तनाव और जिम कल्चर का यह डबल कॉम्बिनेशन युवाओं को कम उम्र में ही हाइपरटेंशन के हाई रिस्क जोन में ला रहा है। मैक्स हॉस्पिटल के डायरेक्टर कार्डियोलॉजी डॉ. अरुण गुप्ता के अनुसार आजकल युवाओं में बिना डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट की सलाह के प्रोटीन पाउडर, प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट्स, फैट बर्नर और एनाबॉलिक स्टेरॉयड लेने का चलन तेजी से बढ़ा है। उन्होंने बताया कि कई सप्लीमेंट्स में अधिक कैफीन, स्टिमुलैंट्स, स्टेरॉयड होते हैं, जो ब्लड प्रेशर बढ़ा सकते हैं। सिर्फ प्रोटीन पाउडर लेना हर बार नुकसानदायक नहीं होता, लेकिन गलत मात्रा, खराब क्वालिटी के प्रोडक्ट, जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल और पानी की कमी के साथ सेवन करने पर हाई बीपी, हार्ट रेट बढ़ने और किडनी पर असर का खतरा बढ़ जाता है। लाइफस्टाइल से जुड़े हाई बीपी के मामलों में युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ओपीडी में आने वाले हाई बीपी मरीजों में करीब 15 से 20 प्रतिशत मरीज युवा वर्ग के हैं।
अब BP सिर्फ पुरुषों की बीमारी नहीं: मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संजीव चौधरी के अनुसार पहले हाई बीपी को मुख्य रूप से पुरुषों की बीमारी माना जाता था लेकिन अब महिलाओं और पुरुषों के बीच का अंतर तेजी से कम हो रहा है। उन्होंने कहा कि गुड़गांव जैसे शहरों में सेडेंटरी लाइफस्टाइल, तनाव, स्मोकिंग, ड्रिंकिंग और मोटापा मिलकर हाई बीपी की बड़ी वजह बन रहे हैं। कामकाजी महिलाओं में तनाव, नींद की कमी और फिजिकल एक्टिविटी घटने से जोखिम बढ़ रहा है।
सप्लीमेंट में क्या मिल रहा, किसी को पता नहीं: सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संजय चुघ ने कहा कि जिम में दिए जा रहे सप्लीमेंट की गुणवत्ता और कंटेंट को लेकर कोई खास निगरानी नहीं होती। लोगों को पता ही नहीं होता कि वो क्या ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि ज्यादातर फिजी और एनर्जी ड्रिंक्स में हाई सोडियम और कैफीन कंटेंट होता है। इनका लगातार इस्तेमाल ब्लड प्रेशर बढ़ाने के साथ स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ा सकता है। उनके मुताबिक कैफीन एडिक्शन, स्टेरॉयड और अनियंत्रित सप्लीमेंट का कॉम्बिनेशन हाई रिस्क में डाल सकता है। डॉक्टरों के अनुसार जिम में इस्तेमाल होने वाले स्टेरॉयड शरीर के हार्मोन सिस्टम को प्रभावित करते हैं। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। हार्ट की मांसपेशियां मोटी हो सकती हैं और हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। इतना ही नहीं इसका असर किडनी और लिवर पर भी पड़ता है।

