आज से पुरुषोत्तम मास, नहीं होंगे मांगलिक कार्य

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आज से पुरुषोत्तम मास का आरंभ हो रहा है। इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे। यह माह 15 जून तक रहेगा। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस मास में भगवान विष्णु की पूजा और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। श्रीमद् भागवत कथा, शिव महापुराण और रामायण पाठ जैसे धार्मिक अनुष्ठान करने से कष्ट दूर होते हैं।

purushottam maas starts today know why auspicious ceremonies will not happen and what to do this month

NBT न्यूज, लखनऊ

भारतीय कालगणना और सनातन धर्म में विशेष आध्यात्मिक महत्व रखने वाला अधिक मास इस साल ज्येष्ठ माह में रविवार से शुरू होगा। इसे पुरुषोत्तम मास व मलमास भी कहा जाता है। ये 15 जून तक रहेगा।

सीतापुर रोड स्थित हाथी बाबा मंदिर के ज्योतिषाचार्य आनंद दुबे ने बताया कि जिस महीने में सूर्य की कोई संक्रांति नहीं होती अर्थात सूर्य राशि परिवर्तन नहीं करते हैं, उसे अधिक मास कहा जाता है। सौर मास और चंद्र मास के अंतर को समायोजित करने के लिए ऋषियों-मुनियों ने प्रत्येक तीसरे वर्ष यानि 32 महीने और 16 दिन के अंतराल पर इसकी व्यवस्था की है।

भगवान विष्णु हैं इसके अधिष्ठाता: ज्योतिषाचार्य आनंद दुबे ने बताया कि शास्त्रों में वर्णित है कि इस माह के फलदाता, भोक्ता और अधिष्ठाता स्वयं भगवान विष्णु नारायण हैं। यही वजह है कि इसे पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस मास में किए गए पूजन और दान का साधक को अक्षय फल प्राप्त होता है।

भक्ति-दान के लिए श्रेष्ठ समय: शास्त्रों के अनुसार, ईश्वर भक्ति के उद्देश्य से किए गए कार्यों के लिए यह समय बेहद उत्तम है। इस महीने में श्रीमद् भागवत कथा, शिव महापुराण, रामायण पाठ, सुंदरकांड, जप, अनुष्ठान, हवन, रुद्राभिषेक और दान-पुण्य करने से व्यक्ति की परेशानी दूर हो जाती है। इसके अलावा, पुरुषोत्तम मास में श्रद्धापूर्वक किया गया स्नान, व्रत और उपवास साधक को भगवान नारायण की विशेष कृपा का पात्र बनाता है।