PM की अपील पर नौकरीपेशा व व्यापार करने वाले रेलवे के दैनिक यात्री बोले

नवभारतटाइम्स.कॉम

प्रधानमंत्री की सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करने की अपील के बीच दिल्ली-पलवल रेलखंड के दैनिक यात्री परेशान हैं। ईएमयू ट्रेनों के देरी से चलने और कोरोना काल से बंद ट्रेनों के अब तक बहाल न होने से लाखों लोग प्रभावित हैं। छोटी दूरी तय करने में भी घंटों लग रहे हैं।

daily commuters troubled by pms appeal local trains late jobholders and traders say how to use public transport

अपर हेड: प्रधानमंत्री की अपील पर नौकरीपेशा व व्यापार करने वाले दैनिक यात्री बोले

क्रॉसर

एक्सप्रेस ट्रेनों को निकालने के लिए ईएमयू ट्रेनों को रोकने से दैनिक यात्रियों को होती है दिक्कत

कोरोना काल के बाद बंद हुई ट्रेनों में आधी ट्रेनें आज तक नहीं चलीं

- ट्रेनों की लेट लतीफी के चलते निजी साधनों से चलने लगे लोग

Bhola.Pandey@timesofindia.com

फरीदाबाद: प्रधानमंत्री की ओर से देशवासियों से सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने की अपील के बीच दिल्ली-पलवल रेलखंड पर सफर करने वाले लाखों दैनिक यात्रियों का दर्द एक बार फिर चर्चा में आ गया है। यात्रियों का कहना है कि जब लोकल ट्रेनें समय पर ही नहीं चलेंगी तो लोग निजी वाहन छोड़कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर भरोसा कैसे करें। दिल्ली, फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और पलवल के बीच रोज सफर करने वाले नौकरीपेशा, फैक्टरी कर्मी और छात्र बताते हैं कि अब उनका हर दिन स्टेशन की भीड़, लेट ट्रेनों और आउटर पर रुकने के इंतजार में गुजर रहा है। हालत यह है कि महज 25 से 30 किलोमीटर की दूरी तय करने में भी दो से तीन घंटे लग जाते हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि तुगलकाबाद से पलवल तक चौथी लाइन होने के बाद भी ईएमयू ट्रेनें समय पर नहीं चल पा रही हैं।

शाम के पीक आवर्स में सबसे ज्यादा परेशानी

शाम को ऑफिस और फैक्ट्रियों की छुट्टी के बाद स्थिति और खराब हो जाती है। दिल्ली से फरीदाबाद और पलवल की ओर जाने वाली ईएमयू ट्रेनें अक्सर एक से डेढ़ घंटे तक लेट चलती हैं। कई बार ट्रेनें तुगलकाबाद या आउटर पर लंबे समय तक खड़ी रहती हैं। दैनिक यात्रियों का आरोप है कि रेलवे प्रशासन एक्सप्रेस और लंबी दूरी की ट्रेनों को प्राथमिकता देता है। इसी वजह से ईएमयू ट्रेनों को बीच रास्ते में रोक दिया जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जिन्हें रोज समय पर दफ्तर पहुंचना और देर रात घर लौटना पड़ता है।

एक लाख से ज्यादा लोग रोजाना प्रभावित

रेलवे सूत्रों के मुताबिक कोसीकलां, होडल, पलवल, बल्लभगढ़, न्यू टाउन और फरीदाबाद से दिल्ली आने-जाने वाले एक लाख से अधिक यात्री रोज इस रूट की शटल और ईएमयू ट्रेनों पर निर्भर हैं। अकेले पलवल से ही प्रतिदिन 21 से 22 हजार यात्री सफर करते हैं, असावटी से 4500 से 5000, बल्लभगढ़ से करीब 13 हजार, फरीदाबाद से 8 से 10 हजार यात्री रोज आते जाते हैं।

पहले चलती थीं 44 अब 24 ट्रेनें

यात्रियों की नाराजगी की एक बड़ी वजह कोरोना काल के बाद बंद हुई ट्रेनों का अब तक शुरू न होना भी है। कोरोना से पहले पलवल-नई दिल्ली रेलखंड पर 22 अप और 22 डाउन यानी कुल 44 ट्रेनें चलती थीं, लेकिन अब केवल 24 ट्रेनें ही संचालित हो रही हैं। पांच साल बाद भी 20 ईएमयू ट्रेनें बंद पड़ी हैं। दैनिक यात्रियों का कहना है कि जब यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, तब ट्रेनों की संख्या घटने से भीड़ और परेशानी दोनों बढ़ गई हैं। रेलवे सूत्रों का कहना है कि तुगलकाबाद से पलवल तक करीब 33.5 किलोमीटर की दूरी तक फोर्थ लाइन के निर्माण का कार्य अगस्त 2019 में पूरा कर लिया गया था। तब अधिकारियों ने दावा किया था कि इस रूट पर ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए फोर्थ लाइन से ईएमयू ट्रेनों को चलाया जाएगा लेकिन हुआ इससे अलग, ज्यादातर फोर्थ लाइन का उपयोग मालगाड़ियों को चलाने के लिए किया जा रहा है।

ट्रेनों की तीन दिन की लेटलतीफी

पिछले तीन दिनों के ट्रेनों के परिचालन पर नजर डालें तो दिल्ली से पलवल की ओर शाम के वक्त पीक आवर्स में ईएमयू ट्रेनें दो घंटे से अधिक की देरी से चलीं। पहली मथुरा शटल 14 मई को एक घंटे 30 मिनट, 15 मई को एक घंटा दो मिनट और 16 को 42 मिनट की देरी से चली। इसी तरह 64492 महिला स्पेशल 14 को 40 मिनट, 15 को 27 मिनट और 16 मई को 20 मिनट की देरी से चली। काेसीकलां जाने वाली 64082 शटल 14 काे 1 घंटा 18 मिनट, 15 को एक घंटा, 16 मई को 35 मिनट की देरी, शकूरबस्ती से पलवल जाने वाली 64906 शटल 14 को 2 घंटा नौ मिनट, 15 को 2 घंटा 10 मिनट और 16 को दो घंटा की देरी, दूसरी मथुरा 64910 शटल 14 को 2 घंटा 25 मिनट, 15 को 2 घंटा 40 मिनट और 16 को 2 घंटा नौ मिनट की देरी से चली।

दैनिक यात्री बोले

पिछले कई वर्षों से ट्रेन से फरीदाबाद आना-जाना करते हैं, लेकिन इन दिनों व्यवस्था और खराब हो गई है। शाम के वक्त पीक आवर्स में ट्रेनाें का परिचालन पूरी तरह से बिगड़ चुका है। पलवल तक 30 किमी की दूरी तय करने में दो से ढाई घंटे लग जाते हैं। लाेगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर करने का मेसेज देने से पहले रेलवे की व्यवस्था में सुधार करने की जरूरत है। - मनोज कुमार दैनिक यात्री पलवल

ईएमयू काे चलाने में समय का अनुपालन नहीं हो रहा है। शाम को कब तक घर पहुंचेगे कोई भरोसा नहीं। कभी-कभी तो लगता है कि अपनी ही गाड़ी से आना जाना करें तो समय बचेगा। ऐसे में लोग कैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर भरोसा कर नौकरी करने के लिए जाएं। - आदित्य ठाकुर, दैनिक यात्री सैनिक कॉलोनी

आम पब्लिक तभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर सकती है जब इनका सुचारु रूप से परिचालन हो। कोरोना काल से बंद की गयी ट्रेन अभी तक पूरी तरह बहाल नहीं की गई। जिन गाड़ियों को चलाया जा रहा है वो भी अपने निर्धारित समय से दो से तीन घंटे देरी से चलती हैं। लोकल ट्रेनों को राइट टाइम चलाने की जरूरत है। - ललित कुमार, दैनिक यात्री, जवाहर कॉलोनी