तुरंत पाने की होड़ में जीवन भी हो गया रील्स की तरह

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आज रील्स और छोटे वीडियो केवल मनोरंजन नहीं रह गए हैं। ये मनुष्य का ध्यान भटका रहे हैं और सोचने का तरीका बदल रहे हैं। मोबाइल स्क्रीन पर लगातार बदलते दृश्यों से मन को ठहरने का अवसर नहीं मिलता। इससे लंबा पढ़ना, शांत बैठना कठिन लगने लगा है। ध्यान का बिखराव जीवन को टुकड़ों में बांट रहा है।

reels addiction from entertainment to lifes basis a serious issue of attention diversion and mental fatigue

आज रील्स और छोटे विडियो केवल मनोरंजन का जरिया नहीं रह गए हैं, वे मनुष्य का ध्यान भटका रहे हैं और सोचने के तरीके को बदल रहे हैं। पहले मनोरंजन जीवन का एक हिस्सा था, अब मनोरंजन ही जीवन का आधार बनता जा रहा है। मोबाइल स्क्रीन पर उंगलियां चलती रहती हैं, दृश्य बदलते रहते हैं और मन कुछ क्षणों के उत्साह के बाद फिर खाली महसूस करने लगता है। बाहर से यह सब रंगीन और आकर्षक दिखाई देता है, लेकिन भीतर मानसिक थकान धीरे-धीरे जमा होती रहती है।

डिजिटल माध्यमों ने जानकारी को आसान बनाया, लेकिन समस्या तब शुरू हुई जब उन्होंने मनुष्य के ध्यान पर कब्जा करना शुरू कर दिया। रील्स का पूरा ढांचा मनोविज्ञान पर आधारित है। कुछ सेकंड में हंसी, आश्चर्य, भावुकता या आकर्षण पैदा होता है और तुरंत अगला दृश्य सामने आ जाता है। लगातार बदलते दृश्यों के कारण मन को ठहरने का अवसर नहीं मिलता। यही वजह है कि अब लंबा पढ़ना कठिन लगता है, शांत बैठना उबाऊ लगता है और बिना मोबाइल के कुछ मिनट बिताना भी बेचैनी पैदा करता है।

ध्यान केवल मानसिक क्षमता नहीं, बल्कि जीवन की दिशा तय करने वाली शक्ति है। जिस चीज पर मन टिकता है, व्यक्ति धीरे-धीरे वैसा ही बनने लगता है। यदि ध्यान हर समय बिखरा रहे, तो भीतर स्थिरता और स्पष्टता विकसित नहीं हो पाती। आज लोग बहुत कुछ देख रहे, लेकिन समझ कम रहे हैं। अनुभव बढ़ रहे हैं, पर अनुभूति की गहराई घटती जा रही है। रील्स का प्रभाव केवल समय की बर्बादी तक सीमित नहीं है। इसने धैर्य को भी कमजोर किया है। अब हर चीज तुरंत चाहिए। संवाद छोटे हो गए हैं, विचार संक्षिप्त हो गए हैं और गंभीर चिंतन की जगह झटपट प्रतिक्रिया देने की आदत ने ली है।

भारतीय चिंतन में मन को साधना सबसे बड़ी साधना मानी गई है। आज तकनीक ने विचलन को हमारी जेब तक पहुंचा दिया है। इसलिए आज सबसे बड़ा संघर्ष अपने ध्यान को बचाए रखना बन गया है। क्योंकि यदि ध्यान बिखर जाएगा, तो जीवन भी धीरे-धीरे टुकड़ों में बंटने लगेगा।