NBT रिपोर्ट: भारतीयों की थाली में आज भी अनाज (गेहूं और चावल) का बोलबाला है, जबकि शरीर के लिए जरूरी दालों, सब्जियों, फल, दूध और मछली को नजरअंदाज किया जा रहा है। एक सरकारी स्टडी में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है। इस स्टडी में भारतीय परिवारों के खाने-पीने के तौर-तरीकों की तुलना इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा तय किए गए पोषण के नियमों से की गई है। ICMR के मुताबिक, एक व्यक्ति को महीने में 7.5 किलो अनाज खाना चाहिए।
गांवों की बात करें तो पश्चिम बंगाल, ओडिशा, त्रिपुरा और मणिपुर (11.2 किलो) में सबसे ज्यादा अनाज खाया जाता है। इसके बाद बिहार (11.1 किलो), राजस्थान (10.5 किलो) और छत्तीसगढ़ (10.3 किलो) का नंबर आता है। वहीं शहरों में त्रिपुरा (11.2 किलो) सबसे आगे है। इसके बाद मणिपुर (11.1 किलो), बिहार (10.5 किलो), अरुणाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ (10.4 किलो) का स्थान है। आमतौर पर देखा गया है कि जैसे-जैसे लोगों की कमाई बढ़ती है, वे अनाज कम खाते हैं और प्रोटीन व फैट वाली चीजें ज्यादा लेने लगते हैं।
TOI के मुताबिक, सांख्यिकी मंत्रालय की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अब रेस्तरां में खाना और पैकेट बंद फूड खाना लोगों के लाइफस्टाइल का हिस्सा बन गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस आदत की वजह से देश में गैर-संक्रामक बीमारियां तेजी से बढ़ेंगी।

