n NBT रिपोर्ट, गुड़गांव
देश के प्रमुख आईटी और ऑटोमोबाइल हब के रूप में पहचान बना चुके गुड़गांव की सफाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर में जगह-जगह पड़े कूड़े के ढेर, डोर-टू-डोर कलेक्शन के लिए गाड़ियों की कमी और ओपन डंपिंग की बढ़ती समस्या ने हालात बिगाड़ दिए हैं। ऐसे समय में केंद्रीय आवासन और शहरी मंत्रालय की टीम स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत शहर की जमीनी हकीकत परखने पहुंची है। एक ओर नगर निगम बेहतर रैंकिंग की उम्मीद कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बदहाल पब्लिक टॉइलट, बंधवाड़ी में कूड़े का पहाड़ और सफाई कर्मचारियों की हाल ही में हुई हड़ताल शहर की छवि पर असर डाल सकती है। अब देखना है कि आईटी और ऑटोमोबाइल में देश में टॉप फाइव शहरों में रहने वाले इस शहर को इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में क्या रैकिंग मिलती है।
सोमवार को शहर में पहुंची केंद्रीय अवासन और शहरी मंत्रालय की टीम ने शहर में स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए पड़ताल शुरू कर दी है। अगले चार दिन टीम शहर में रहेगी। आठ सदस्यों की टीम सोमवार को शहर में पहंची है। इनमें से दो- दो सदस्यों की टीम बनाकर चारों जोन में पड़ताल शुरू की गई है। एक सप्ताह तक यह टीम शहर में रहेगी। इस दौरान टीम सेनिटेशन विंग की ओर से किए जाने वाले कार्यों के अलावा लोगों का फीडबैक लेगी। देश भर में यह स्वच्छ सर्वेक्षण पूरा होने के बाद इसकी रैकिंग जारी की जाती है, लेकिन इस बार शहर में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल रही, गार्बेज का प्रॉपर ट्रीटमेंट नही हो सका, वहीं ओपन डंपिंग के साथ ही पब्लिक टॉइलट के हालात भी खासे सही नहीं है। जो कि सभी के सामने है। वहीं इसके अलावा पब्लिक की ओर से टीम को दिए जाने वाला फीडबैक भी काफी मायने रखेगा।
बंधवाड़ी प्लांट में भी है कूड़े की भरमार: बंधवाड़ी प्लांट पर 17 लाख टन कूड़े का पहाड़ है। हालांकि दो एजेंसियों का काम दिया गया है, लेकिन हर दिन का टारगेट एजेंसी पूरा नहीं कर रही हैं। रोड स्वीपिंग मामले में भी मशीनें कम हैं। नगर निगम के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि स्वचछता सर्वेक्षण के लिए टीम साेमवार को गुड़गांव पहुंच चुकी है।

