IMT मानेसर बनेगा स्मार्ट पावर हब, फॉल्ट, कटौती से मिलेगी मुक्ति

नवभारतटाइम्स.कॉम

आईएमटी मानेसर को जल्द ही हाईटेक बिजली नेटवर्क मिलेगा। 150 करोड़ की लागत से स्मार्ट ग्रिड सिस्टम विकसित होगा। ओवरहेड तारों को हटाकर भूमिगत नेटवर्क बनेगा। इससे उद्योगों को निर्बाध और सुरक्षित बिजली सप्लाई मिलेगी। यह परियोजना जनवरी 2028 तक पूरी होगी। इससे उत्पादन बढ़ेगा और आर्थिक नुकसान कम होगा।

IMT मानेसर बनेगा स्मार्ट पावर हब, फॉल्ट, कटौती से मिलेगी मुक्ति

Yashlok.Singh

@timesofindia.com

n गुड़गांव : आईएमटी मानेसर के उद्योगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। वर्षों से बिजली कटौती, बार-बार ट्रिपिंग और फॉल्ट की समस्या से जूझ रहे इस इंडस्ट्रियल एरिया को अब हाईटेक बिजली नेटवर्क मिलने जा रहा है। केंद्र सरकार की रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के अंतर्गत करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से पूरे IMT क्षेत्र में स्मार्ट ग्रिड सिस्टम विकसित किया जाएगा। योजना के तहत बिजली के ओवरहेड तारों को हटाकर भूमिगत नेटवर्क तैयार होगा, जिससे उद्योगों को निर्बाध और सुरक्षित सप्लाई मिलेगी। इससे निवेशकों का झुकाव भी बढ़ेगा।

स्मार्ट सिटी प्रॉजेक्ट के अधिकारियों के मुताबिक, परियोजना का आवंटन जनवरी 2026 में किया गया था और इसे जनवरी 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में सर्वे का काम तेजी से जारी है। मई के अंत तक सर्वे पूरा होने के बाद जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इस प्रॉजेक्ट को IMT मानेसर के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है, क्योंकि यहां लगातार बिजली फॉल्ट के कारण इंडस्ट्रियल यूनिट्स में उत्पादन प्रभावित होता रहा है।

11 हजार वोल्ट की बिजली लाइनें होंगी अंडरग्राउंड: सबसे बड़ा बदलाव 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइनों को लेकर होगा। अभी तक सेक्टरों में फैली ओवरहेड बिजली लाइनें आंधी, बारिश और तेज हवाओं के दौरान बार-बार फॉल्ट का कारण बनती हैं। कई बार घंटों तक बिजली सप्लाई बाधित रहने से फैक्ट्रियों में काम पूरी तरह से बंद हो जाता है। अब इन सभी लाइनों को भूमिगत किया जाएगा। इससे न केवल तकनीकी फॉल्ट कम होंगे बल्कि हादसों का खतरा भी काफी हद तक घट जाएगा।

देश का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल हब है IMT मानेसर: आईएमटी मानेसर हरियाणा का प्रमुख इंडस्ट्रियल एरिया होने के साथ-साथ देश का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल हब भी है। यहां पर ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बड़ी कंपनियां हैं। यह एरिया 4018 एकड़ में फैला है। अभी बिजली फॉल्ट और ट्रिपिंग के कारण उद्योगों को हर महीने भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कई यूनिट्स को बैकअप सिस्टम व जनरेटर पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ती जा रही है। स्मार्ट ग्रिड लागू होने से उद्योगों की उत्पादन क्षमता में सुधार आएगा।

प्रॉजेक्ट की फंडिंग का ढांचा: स्मार्ट ग्रिड की यह परियोजना केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत पावर फाइनैंस कॉरपोरेशन और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन की निगरानी में लागू हो रही है। 60 प्रतिशत फंड केंद्र और 40 प्रतिशत हरियाणा सरकार दे रही है।