NBT रिपोर्ट
बैंकों को पैसा जुटाने के लिए अब पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में उम्मीद है कि जल्द ही आपकी FD ( Fixed Deposit ) पर मिलने वाले ब्याज में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
दरअसल, सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD) की दरें अप्रैल के मुकाबले मई में 0.60% से 0.70% (60 से 70 बेसिस पॉइंट्स) तक बढ़ गई हैं। मई में एक साल वाले सीडी (CD) रेट्स 7.70% पर पहुंच गए हैं, जबकि अप्रैल के आखिर में ये करीब 7% थे। मार्केट में कैश (लिक्विडिटी) की कमी और पैसों की मांग बढ़ने की वजह से बैंकों को 500 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा के बड़े डिपॉजिट पर ऊंची दरें ऑफर करनी पड़ रही हैं।
जानकारों का मानना है कि डिपॉजिट की लागत बढ़ने का असर आम लोगों के डिपॉजिट रेट्स पर पड़ेगा। भले ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया तुरंत अपनी पॉलिसी रेट्स न बढ़ाए, लेकिन उनमें उछाल आएगा। हालांकि, डिपॉजिट रेट्स में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह काफी हद तक आरबीआई के आने वाले फैसलों पर निर्भर करेगा।
जना स्मॉल फाइनैंस बैंक के ट्रेजरी हेड गोपाल त्रिपाठी ने ET को बताया कि सीडी रेट्स का बढ़ना साफ दिखाता है कि बैंकों के लिए पैसा जुटाना महंगा हो रहा है।
त्रिपाठी ने बताया कि एक साल के सरकारी ट्रेजरी बिल (सरकार के कर्ज लेने का पैमाना माना जाता है) और एक साल के सीडी रेट के बीच अब 2% (200 बेसिस पॉइंट्स) का अंतर आ गया है। आम तौर पर यह अंतर 1.30% से 1.40% के आसपास रहता है। यह अंतर बैंकिंग सिस्टम में कैश की कमी की ओर इशारा करता है।
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के डायरेक्टर सौम्यजीत नियोगी का कहना है कि सिस्टम में कैश की उपलब्धता मार्च में कुल डिपॉजिट की करीब 2.5% थी। यह अब घटकर 0.5% रह गई है। आने वाले समय में जब बैंक MSMEs को सरकारी पैकेज के तहत बड़े पैमाने पर लोन बाटेंगे, तो कैश की किल्लत और बढ़ेगी। ऐसे में डिपॉजिट रेट्स का बढ़ना तय है।
पब्लिक सेक्टर बैंक के एक अधिकारी ने चिंता जताते हुए बताया कि म्यूचुअल फंड से सीडी (CDs) में आने वाला पैसा भी कम हो गया है, जिससे स्थिति और कठिन हो गई है।

