250 CM एक्सिलेंस स्कूल खुलेंगे

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हरियाणा में 250 सरकारी स्कूलों को चीफ मिनिस्टर एक्सीलेंस एंड अर्ली इंग्लिश एजुकेशन स्कूल बनाया जाएगा। इन स्कूलों में पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई होगी। दूसरी कक्षा से हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के अलग-अलग सेक्शन होंगे। इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाना और छात्रों को प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है।

250 CM एक्सिलेंस स्कूल खुलेंगे

NBT न्यूज, चंडीगढ़

देश के राजकीय स्कूलों में अब स्मार्ट कक्षाओं में विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा दी जाएगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की घोषणा को अमलीजामा पहनाते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 250 सरकारी स्कूलों को चीफ मिनिस्टर एक्सीलेंस एंड अर्ली इंग्लिश एजुकेशन स्कूल (सीएम-ईईई) बनाने की शुक्रवार को घोषणा की है। सीएम-ईईई स्कूलों में विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही बेहतर अंग्रेजी शिक्षा प्रदान की जाएगी। नोटिफिकेशन के अनुसार इन स्कूलों में पहली कक्षा से पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम में कराना अनिवार्य होगा। वहीं दूसरी कक्षा से हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के अलग-अलग सेक्शन संचालित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका मकसद सरकारी स्कूलों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली के अनुरूप विकसित करना तथा विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धात्मक माहौल उपलब्ध कराना है, ताकि राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धाओं के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकें। इसके साथ-साथ आधुनिक स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल शिक्षण संसाधन, ई-लर्निंग सुविधाएं और तकनीकी आधारित शिक्षण पद्धतियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। सीएम-ईईई में विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, संवाद कौशल, तकनीकी समझ और रचनात्मक सोच को मजबूत किया जाएगा, ताकि स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण वातावरण विकसित किया जाए सके। सीएम-ईईई योजना से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के बीच शिक्षा के स्तर में अंतर कमी आएगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी वही आधुनिक सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी, जो निजी एवं बड़े शहरी विद्यालयों में मिलती हैं।इससे सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों का विश्वास और अधिक मजबूत होगा तथा अधिक विद्यार्थी सरकारी विद्यालयों की ओर आकर्षित होंगे। ृ

सभी स्कूल हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी से संबद्ध बने रहेंगे। छात्रों की बोर्ड व्यवस्था ा में कोई बदलाव नहीं होगा निर्धारित नियमित फंड के अलावा छात्रों से किसी प्रकार की अतिरिक्त फीस या आर्थिक योगदान नहीं लिया जाएगा। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के विद्यार्थियों को राहत मिलेगी।