Election Commissions Special Campaign Voter List Correction No More Mistakes
अब न हो चूक
नवभारतटाइम्स.कॉम•
चुनाव आयोग ने Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर विशेष अभियान शुरू करने का फैसला ऐसे समय लिया है, जब उसके खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। उसके कई फैसलों को संदेह की नजर से देखा जा रहा है और आयोग को बार-बार स्पष्टीकरण देना पड़ रहा है।
सूचियों का मिलान । अभियान के तहत BLO मौजूदा मतदाता सूची का SIR से पहले की सूची से मिलान करेंगे। जिनके नाम पहले थे, पर अब नहीं हैं, उनकी स्थिति घर-घर जाकर जांची जाएगी। चुनाव आयोग और राज्य के चुनाव अधिकारियों के डेटा के मुताबिक, SIR प्रक्रिया के बाद 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाताओं में 10.2% की कमी आई है। बताया जा रहा है कि करीब 13 करोड़ नाम कटे हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि ये सारे लोग योग्य थे और गलत तरीके से बाहर किए गए। 60 लाख से ज्यादा तो ऐसे मतदाताओं के नाम हटे हैं, जिनकी मौत हो चुकी है।कोई न छूटे । आयोग ने हर राज्य में प्रक्रिया पूरी होने के बाद बताया था कि कहां कितने मृत, डुप्लिकेट या स्थानांतरित नाम हैं। लेकिन, संख्या को लेकर बार-बार विवाद हो रहा है। नई और पुरानी, दोनों वोटर लिस्ट के मिलान से पता चलने की उम्मीद है कि कोई वास्तविक नाम तो नहीं छूटा। चुनाव आयोग को इस फलसफे पर काम करना चाहिए कि एक भी योग्य मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रह जाए। अगर प्रक्रिया जटिल है, तो इसका नुकसान जनता को नहीं होना चाहिए।
निर्धारित समय । हर BLO को एक सप्ताह में 20 से 25 मतदाताओं तक पहुंचने का निर्देश दिया गया है। एक महीने में वेरिफिकेशन का काम पूरा होने की उम्मीद लगाई जा रही है। अगले साल कई राज्यों में होने वाले चुनावों को देखते हुए एक समय सीमा निर्धारित करना बेहद जरूरी है। ये सारे मुद्दे और विवाद विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया शुरू होने के पहले तक सुलझ जाने चाहिए। यह ठीक नहीं होगा कि जब चुनाव चल रहे हों, तब आयोग की विश्वसनीयता पर अंगुलियां उठ रही हों। इससे आखिरकार संस्था और लोकतंत्र का नुकसान है।
पारदर्शिता रहे । विशेष अभियान आयोग के लिए मौका है, जब वह सारे सवालों के जवाब दे सकता है। इसके लिए जरूरी है कि पूरी पारदर्शिता रखी जाए। अगर कोई योग्य नाम पुरानी सूची में था और नए में जगह नहीं पा सका, तो उसके पीछे का कारण भी सामने आना चाहिए। यह अच्छा है कि लिस्ट को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट के साथ शेयर किया जाएगा।