Asian Games 2023 Indias Spectacular Comeback Women Athletes Dominance And Future Hopes
खेलों में नई उम्मीद
नवभारतटाइम्स.कॉम•
स्कोर कार्ड कई बार पूरी कहानी नहीं बताते। कोई खेल किस तरह आगे बढ़ा, खिलाड़ियों की हिम्मत, उनकी वापसी, हार न मानने की जिद और हौसला - आंकड़ों में इनको जगह नहीं मिल पाती। एशियन गेम्स में इस बार भारत की कहानी कुछ ऐसी ही रही। उसने 85 मेडल जीते, पर पिछले एशियाई खेलों के 107 के आंकड़े से बहुत दूर रह गया।
आखिरी वक्त पर वापसी । पदक तालिका में भारत चौथे स्थान पर है। हालांकि इससे अभियान की पूरी तस्वीर नहीं बनती। भारतीय दल की इस बार सबसे बड़ी खासियत रही वापसी। खेल खत्म होने के दो दिन पहले तक भारत टॉप 10 से भी बाहर था और हांगझोउ में जीते कई पदक गंवा चुका था। ऐसा लग रहा था कि आइची नागोया से इस बार ज्यादा उदासी लौटेगी, पर दो दिनों के भीतर पदकों की झड़ी लग गई।गोल्ड में महिलाएं आगे । टीम इवेंट्स में देश के खिलाड़ियों का प्रदर्शन शानदार रहा है। वहीं, गोल्ड की बात करें तो महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले ज्यादा बेहतर खेल दिखाया। उन्होंने टीम इवेंट और व्यक्तिगत स्पर्धाओं में 11 गोल्ड मेडल जीते हैं, जबकि मिक्स्ड में भी तीन स्वर्ण आए। महिलाओं की यह दमदार भागीदारी भारतीय खेलों के लिए उतनी ही अच्छी खबर है, जितनी यह कि देश के छोटे शहरों, कस्बों और गांवों से खिलाड़ी निकल रहे हैं। प्राची चौधरी, अंकुश पंघाल, कीर्ति शर्मा, सलमान खान जैसे नाम एक पूरी नई जेनरेशन को प्रेरित करेंगे।
दायरा फैल रहा । भारत की एक और बड़ी ताकत यह नजर आई कि उसकी सफलता अब कुछ खेलों तक सीमित नहीं है। सॉफ्ट टेनिस, मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स और स्कीट में पदक मिले। गोल्फ में प्रणवी उर्स ने इतिहास रचा। महिला हॉकी टीम 44 साल बाद सोना जीती। ये प्रदर्शन उम्मीद जताते हैं कि देश में खेलों का दायरा बढ़ रहा है। एक बार जब भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआत कर दी है, तो अब इन पर फोकस बढ़ेगा और आगे इस तरह के और भी प्रदर्शन देखने को मिलेंगे।
बेहतरी की ओर । एशियन गेम्स में मिली हर जीत सराहना के योग्य है, पर कुछ बातें याद रखना जरूरी हैं। भारत चौथे स्थान पर तो है, पर पहले तीन स्थान पर काबिज देश उससे बहुत आगे हैं। और 154 गोल्ड जीतने वाले चीन से तो फिलहाल कोई तुलना ही नहीं है। लेकिन, खेलों की महाशक्ति बनने के लिए भारत को तुलना करनी पड़ेगी। एशियन या कॉमनवेल्थ गेम्स एक कदम हैं, असली मंजिल है ओलिंपिक्स। लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलिंपिक खेलों में दो साल से कम वक्त बचा है। देश को अपने प्रदर्शन का सही आकलन कर अभी से तैयारी में जुट जाना चाहिए।