बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेरा

Contributed by: deep.singh|नवभारतटाइम्स.कॉम•
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n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : इस साल मॉनसून सीजन में फसलों को शुरुआती तौर पर जैसी बारिश चाहिए थी, वैसी मिली। जून में बारिश कम रही और मॉनसून कुछ देर से आया, लेकिन जुलाई की शुरुआत से रुक-रुककर पानी बरसता रहा। इससे धान की रोपाई और दूसरी फसलों की बोआई समय पर हो गई। अगस्त में पौधे बढ़ने के बाद अच्छी बारिश हुई, जिससे किसानों को सिंचाई पर ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ा।

अब यही बारिश किसानों के लिए संकट बन गई है। धान की ज्यादातर फसल पककर तैयार है और कई जगह कटाई के इंतजार में खड़ी है। बुधवार और गुरुवार को लखनऊ, बाराबंकी, सुलतानपुर, फर्रुखाबाद, उन्नाव, गोरखपुर, संभल समेत कई जिलों में बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं, जिससे पकी फसलें गिर गईं। खेतों में गिरी धान की बालियों में नमी बढ़ने, दाना खराब होने और रोग लगने का खतरा है।
बाजरा की फसल में भी बालियां और दाना बनने लगा है। पौधा बड़ा और कमजोर होने के कारण तेज हवा में गिर रहा है। आगरा के किसान जितेंद्र सिंह के अनुसार हवा से बाजरा जमीन पर बिछ जाता है और बारिश से दाना बनने में बाधा आती है। अम्बेडकर नगर के किसान नरेंद्र ने बताया कि पकी धान की फसल को तेज हवा और पानी ने नुकसान पहुंचाया है। तोरिया को भी क्षति हुई है। फर्रुखाबाद में बारिश से आलू की बोआई देर से होगी और अगैती आलू को नुकसान हुआ है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. विनोद तिवारी का कहना है कि इस समय होने वाली बारिश अब लाभ नहीं, नुकसान ही पहुंचाएगी।

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