Jail Sentence No Longer Mandatory In Gst Law Big Decisions By Gst Council
GST कानून में दोषी साबित होने पर जेल की सज़ा ही हो, ज़रूरी नहीं
नवभारतटाइम्स.कॉम•
nNBT रिपोर्ट, नई दिल्ली
गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स से जुड़े कानून के तहत अपराध का दोषी साबित होने पर भी जरूरी नहीं है कि जेल की ही सजा हो। GST काउंसिल की 57वीं बैठक में इस बारे में नियमों में बदलाव को मंजूरी दी गई है। काउंसिल ने रजिस्ट्रेशन, कैंसलेशन, रिफंड से लेकर नोटिस और सजा तक के प्रावधानों में ऐसे बदलावों को मंजूरी दी है, जिनसे कारोबार करने की राह और आसान होगी। इस बारे में सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स ने शुक्रवार को अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (FAQ) के जवाब जारी किए।जेल और जुर्माना, दोनों नहीं
काउंसिल ने GST कानून के तहत टैक्स अधिकारियों का किसी को गिरफ्तार करने का अधिकार तो पूरी तरह खत्म कर ही दिया है और मुकदमा चलाने के लिए टैक्स अमाउंट 5 करोड़ रुपये से ज्यादा होने की बात तय की है, GST के तहत अपराधों के लिए अधिकतम सजा में भी बदलाव किए हैं। अब तक चल रही व्यवस्था में जेल और जुर्माने, दोनों की बात थी, लेकिन काउंसिल ने तय किया है कि 1 अप्रैल 2027 से सजा के रूप में जेल या जुर्माने या दोनों की व्यवस्था होगी।
काउंसिल ने तय किया है कि 5 करोड़ से अधिक और 10 करोड़ रुपये तक की टैक्स चोरी के मामले में अधिकतम 2 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। 10 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी में अधिकतम 5 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। फैसला सक्षम अदालत करेगी। हालांकि एक अहम बदलाव यह आएगा कि अगर GST कानून के तहत कोई दोषी साबित हो जाए, तो भी जरूरी नहीं है कि उसे जेल की सजा हो। साथ ही, सेक्शन 132(3) के तहत अभी अनिवार्य रूप से कम से कम 6 महीने की जेल की सजा होती है। यह अनिवार्यता 1 अप्रैल से हट जाएगी।
FICCI प्रेसिडेंट अनंत गोयनका ने कहा, 'काउंसिल ने आसान और बिजनेस फ्रेंडली टैक्स व्यवस्था की ओर अहम कदम बढ़ाया है। FICCI ने समय-समय पर कई सुझाव दिए थे। उनमें से कई पर ध्यान दिया गया। प्रशासन और करदाताओं के बीच भरोसा बढ़ाने और नियमों के पालन की लागत घटाने से बिजनेस कॉन्फिडेंस मजबूत होगा।'