उपचुनाव परिणाम: तीन राज्यों में सत्ताधारी पार्टियों ने हासिल की जीत, भाजपा और एआईएनआरसी आगे
उपचुनाव परिणाम: तीन राज्यों में सत्ताधारी पार्टियों ने हासिल की जीत, भाजपा और एआईएनआरसी आगे
NewsPoint•
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। तीन राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए उपचुनावों में सत्ताधारी दल जीत की ओर बढ़ रहे हैं। वोटों की गिनती लगभग पूरी हो चुकी है। शुक्रवार को पांच विधानसभा और एक लोकसभा सीट के लिए वोटों की गिनती हुई। असम की नगांव लोकसभा सीट, पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर, तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम, और पुडुचेरी की थट्टानचावडी सीटों पर मतदान हुआ था। ये चुनाव कांग्रेस नेता प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे की वजह से हो रहे थे, जिन्होंने भाजपा में शामिल होकर दिसपुर से विधानसभा चुनाव जीते थे। इस समय, नगांव में भाजपा के देवाशीष शर्मा अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से 1.6 लाख वोटों के बड़े अंतर से आगे चल रहे हैं।
पुडुचेरी के थट्टानचावडी सीट पर सत्ताधारी ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (एआईएनआरसी) ने अपनी स्थिति मजबूत की है। यहां के अशोक आनंद ने कांग्रेस के उम्मीदवार ई. विनायगम को 8,482 वोटों के अंतर से हराया। मुख्यमंत्री नटेसन रंगास्वामी ने यह सीट छोड़ दी थी, जिसमें वह पहले जीत चुके थे। उन्होंने 1990 में थट्टानचावडी से हार के बाद मजबूत वापसी की थी। उन्होंने 2006 में रिकॉर्ड 90 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। रंगास्वामी ने कांग्रेस छोड़कर एआईएनआरसी बनाई और अब वह 2021 और 2026 के चुनावों में जीत हासिल करने में सफल रहे हैं।तमिलनाडु में, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कझगम' (टीवीके) धारापुरम में लगभग 67,000 वोटों से आगे है। मदुरंतकम सीट पर भी टीवीके ने 21 में से 17 राउंड की गिनती के बाद लगभग 58,000 वोटों से बढ़त बनाई है। इस साल की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनावों में, टीवीके ने सबसे बड़ी पार्टी बनकर सरकार बनाई थी।
पश्चिम बंगाल में, भाजपा की हासी रानी रथ ने 1.2 लाख से अधिक वोटों से जीत हासिल की है। वहीं, रेजीनगर में भाजपा ने अपने उम्मीदवार शंकरव सरकार को 75,800 से अधिक वोटों के साथ जीत की ओर बढ़ाया है। रेजीनगर में मुस्लिम आबादी अधिक होने के बावजूद, भाजपा के प्रति झुकाव देखने को मिल रहा है। यहां के पूर्व सांसद हुमायूं कबीर ने पिछली बार जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार उनके बेटे गुलाम नबी आजाद अपनी सीट नहीं बचा पाए।
2011 में हुए परिसीमन के बाद इस सीट का फैसला आबादी के बंटवारे के आधार पर होता रहा है। सुवेंदु अधिकारी ने उपचुनाव से पहले इस बदलाव की भविष्यवाणी की थी। 2011 के चुनाव में, हुमायूं कबीर ने कांग्रेस के उम्मीदवार रहते हुए आरएसपी के सिराजुल इस्लाम मंडल को हराया था। कबीर के तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद, कांग्रेस ने 2013 में यह सीट अपने पास रखी। लेकिन फिर 2016 में तृणमूल के चौधरी ने कबीर को हराकर फिर से जीत हासिल की। 2021 में भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन हार गई। अब, जानकारों का मानना है कि रेजीनगर में शंकरव सरकार की स्थिति यह दर्शाती है कि मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा हिस्सा भाजपा को समर्थन दे रहा है।
इस साल विधानसभा के चुनावों में हार के बाद, तृणमूल कांग्रेस में विभाजन दिखाई दे रहा है। उपचुनावों में उनका प्रदर्शन भी कमजोर रहा है। रेजीनगर में तृणमूल को 4,000 से कम वोट मिले। डेमोक्रेटिक तृणमूल को तो 2,000 से भी कम वोट मिले। नंदीग्राम में, जहां पहले ममता बनर्जी का दबदबा था, उनके उम्मीदवार ने चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया। जबकि विरोधी गुट को सिर्फ 853 वोट मिले।
समाजिक और राजनीतिक स्थिति को देखते हुए, ये उपचुनाव इस बात का संकेत देते हैं कि कैसे भाजपा ने अपनी स्थिति को मजबूत बनाया है। जानकारों का मानना है कि सत्ता गंवाने के बाद पार्टियों का दिशाहीन होना बड़ा कारण है। उपचुनावों में सत्ताधारी दलों की स्थिति से यह भी स्पष्ट होता है कि विरोधी दलों में नेतृत्व का संकट पैदा हुआ है।
इस बार के उपचुनाव ने स्पष्ट कर दिया है कि लोग स्थिरता और विकास की ओर देख रहे हैं। सत्ताधारी दलों की प्रगति यह दर्शाती है कि वे मतदाताओं की अपेक्षाओं पर खरे उतरने में सफल हो रहे हैं। इसके पीछे की वजहें, जैसे कि पिछले चुनावों की स्थिति और नेताओं की रणनीतियां, यह सब आगामी चुनावों में देखने को मिल सकती है।
इन उपचुनावों ने सभी दलों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वे चुनावी मैदान में कैसे उतरेंगे। क्या वे अपने गढ़ को वापिस हासिल करने में सफल होंगे? यह सभी के लिए एक चुनौती बनी हुई है। आने वाले समय में यह देखना रोचक होगा कि यह स्थिति और कैसे विकसित होती है। जहां बड़ी राजनीतिक मुश्किलें उत्थान की ओर इशारा कर रही हैं, वहीं चुनाव परिणामों ने भी संभावित बदलाव की सांकेतिक पेशकश की है।