Rising Treatment Costs Economic Burden On Common Man Hope For Solution From Government
 इलाज बढ़ा रहा आर्थिक बोझ
नवभारतटाइम्स.कॉम•
9 अक्टूबर का संपादकीय ‘रेवड़ियों का इलाज’ पढ़ा। आज के समय में शिक्षा और स्वास्थ्य आम आदमी के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। खासकर इलाज का बढ़ता खर्च लोगों की आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ रहा है। कई बार मरीज को बीमारी की गंभीरता के साथ-साथ दवाओं, जांच और अस्पताल के बिलों की चिंता भी सताती है। इलाज पर कितना खर्च होगा, इसका अंदाजा पहले से लगाना भी मुश्किल होता है। नतीजतन, कई परिवारों को अपनी बचत खर्च करनी पड़ती है या कर्ज लेना पड़ता है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दवा कंपनियों और डॉक्टरों के बीच व्यावसायिक हित मरीजों के इलाज को प्रभावित न करें। इसके साथ ही, स्वास्थ्य सेवा को आम आदमी की पहुंच में लाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
वारिस अली खान, ईमेल से विपक्ष का आंदोलन
प्रजातंत्र में सरकार के खिलाफ किसी भी मुद्दे पर आंदोलन करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन जब CEC और दोनों EC ने कोई मतभेद नहीं होने का स्पष्टीकरण दिया है तो इस मुद्दे को लेकर अराजकता फैलाना लोकतंत्र में उचित नहीं है। जो भी लोग इसमें सम्मलित हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उनको कोई छूट नहीं दी जानी चाहिए कि वह जनता को परेशान कर सकें। ट्रैफिक को जाम कर सकें । सरकार को बेहत सख्ती के साथ उनसे निपटना चाहिए और जो गलत किस्म के लोग इसे लीड कर रहे हैं, उनके खिलाफ एंटी नेशनल एक्ट में प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए।