आज से तकरीबन 4 दशक पहले जब टीवी पर रामायण आता था, तो सड़कें सूनी हो जाती थीं। रामायण जैसे पौराणिक सीरियल ने इसके हर चरित्र को अजरामर बना दिया। रामायण में राम के चरित्र को जाने-माने अभिनेता अरुण गोविल ने इस अंदाज में चरितार्थ किया कि लोग उन्हें राम का अवतार समझने लगे। वे जहां भी जाते लोग उनके चरण स्पर्श कर उनसे आशीष लेते। उनसे जब पूछा जाता है कि उनके जीवन में राम क्या हैं? तो वे भक्ति भाव के साथ कहते हैं, राम एक छोटा सा शब्द है, पर हर स्थिति में प्रत्येक भारतीय मन के साथ जुड़ा होता है।
हमारा मन हर हाल में राम को साक्षी बनाने का आदी है, दुख में हे राम, पीड़ा में अरे राम, लज्जा में हाय राम, अशुभ में अरे राम-राम, शपथ में राम दुहाई, अज्ञानता में राम जाने, दुविधा में राम भरोसे, अचूकता के लिए रामबाण, सुशासन के लिए रामराज्य और अंत में तो राम नाम सत्य है ही, जहां सब कुछ मिट जाता है, पर उसके बाद भी जो बचा रह जाता है, वो है राम। जो हर इंसान को मर्यादा, संस्कार, करूणा और कर्तव्य का सही अर्थ समझाता है, वह है राम। जो हर परिस्थिति में सत्य धर्म और मर्यादा निभाना जानता है, वह है राम। हम सब की आस्था का केंद्र हैं राम, मानवता का गौरव हैं राम, भारतवर्ष की पहचान हैं राम। सनातन संस्कृति के प्राण हैं राम। मेरे लिए राम केवल एक नाम नहीं, मेरी आस्था, मेरे संस्कार, मेरी पहचान और मेरे जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा है।'(रेखा खान से बातचीत