India us Trade Deal What Is The Real Deal And What Is Just For Show
डील बनाम डील
नवभारतटाइम्स.कॉम•
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का कहना है कि दोनों देशों के बीच ट्रेड डील की बातचीत अच्छी गति से आगे बढ़ रही है और ज्यादातर मुद्दे सुलझा लिए गए हैं। उनकी तुलना के मुताबिक, उनके भारत पहुंचने के कुछ ही हफ्तों के भीतर समझौते की घोषणा हो गई, जबकि नई दिल्ली को यूरोपीय यूनियन के साथ डील पर पहुंचने में दो दशक लग गए। तारीखों के इस खेल को गोर द्विपक्षीय बातचीत की सफलता मान रहे हैं। हालांकि भारत के नजरिये से देखें तो महत्वपूर्ण है कि उसे डील से मिला क्या।
तुलना सही नहीं । पहली बात तो यह कि समय को आधार मानकर हो रही तुलना सही नहीं बैठती। यूरोपीय यूनियन के साथ नई दिल्ली की बातचीत भले 2007 में शुरू हुई हो, पर वह लगातार चली नहीं। 2013 से 2022 के दरम्यान वार्ता रुकी हुई थी। इस साल जनवरी आखिर में यह फाइनल हुई और अगले साल फरवरी-मार्च तक लागू होने की उम्मीद है।भारत का फायदा । इस डील को अंतिम रूप देने में भले बरसों लगे, पर इसमें एक-दूसरे की घरेलू प्राथमिकताओं का सम्मान किया गया है। इसमें दोनों पक्षों के लिए नए बाजार में पहुंच आसान बनाने की कोशिश है। डील लागू होने के बाद भारत के ज्यादातर सामान टैरिफ के दायरे से बाहर होंगे। अब इसके बरक्स वॉशिंगटन के साथ चल रही बातचीत रखी जाए, तो अभी यह देखना बाकी है कि भारत को अपने प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले कितनी बेहतर डील मिलती है।
भरोसा खो रहे । एक और बड़ा अंतर रहा अनिश्चितता का। इस साल फरवरी में भारत-अमेरिका ट्रेड डील के फ्रेमवर्क का ऐलान किया गया था। तब से अमेरिका की तरफ से कई बयान आ चुके हैं कि बात अब बस बन ही गई। लेकिन, ऐसा इसलिए नहीं हो पा रहा क्योंकि अमेरिका की तरफ से लगातार दबाव की रणनीति अपनाई जा रही है, जिससे भरोसे की कमी पैदा हुई है।
टैरिफ पर अटके । गोर के बयान की यह विडंबना है कि उन्होंने डील और रूसी गैस व तेल खरीदारों पर 100% टैरिफ की बात एक साथ की। राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप इस पर 10 दिनों में फैसला ले सकते हैं। गोर के मुताबिक, इस कानून का मकसद भारत या किसी देश को सजा देना नहीं, रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। यह स्पष्टीकरण तब बेमायने हो जाता है, जब अमेरिका खुद रूसी डीजल खरीदने के लिए तैयार बैठा है। ट्रंप प्रशासन को अगर अपने लोगों पर पड़ती महंगाई की मार की चिंता है, तो उसे दूसरे देशों की जरूरतों को भी समझना चाहिए।