No Relief For Government Land Grab Accused From High Court Police Investigation Continues
सरकारी ज़मीन हथियाने के आरोपितों को राहत नहीं
नवभारतटाइम्स.कॉम•
nNBT रिपोर्ट, लखनऊ : राजधानी में ग्राम समाज व सरकारी जमीनों का चकबंदी अधिकारियों के फर्जी आदेश से म्युटेशन करवाने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने आरोपितों को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस जांच जारी रख सकती है, लेकिन गिरफ्तारी या अन्य कार्रवाई में बीएनएस की धारा 35(3) और अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
चिनहट, बीबीडी और जानकीपुरम इलाके में 120 बीघा से अधिक ग्राम समाज व सरकारी जमीनों का चकबंदी अधिकारी के फर्जी आदेश से म्यूटेशन करवा लिया गया है। फर्जीवाड़ा सामने आने पर इस मामले में चकबंदी विभाग ने जानकीपुरम, चिनहट और बीबीडी थाने में मुख्य आरोपित सिकंदर खां, जगतपाल व अन्य आरोपितों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करवाई है। हाईकोर्ट में आरोपितों ने एफआईआर को रद करने और गिरफ्तारी से रोक की याचिका दी थी। न्यायमूर्ति रजनीश कुमार और न्यायमूर्ति बबिता रानी की खंडपीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि कथित फर्जी आदेशों से उनका कोई संबंध नहीं है। दो याचिकाकर्ता उस समय नाबालिग थे। यह भी कहा गया कि सह-आरोपी जगतपाल को एक अन्य याचिका में अंतरिम संरक्षण मिल चुका है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और हस्तक्षेपकर्ता सबा कमर की ओर से बताया गया कि याचिकाकर्ताओं ने कथित फर्जी आदेश के आधार पर नामांतरण का आवेदन दिया है। इस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को उक्त आवेदन और उससे संबंधित आदेश-पत्र की प्रति एक सप्ताह के भीतर दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने CRLP(L)101232026 में पारित आदेश में हस्तक्षेप आवेदन स्वीकार करते हुए पीड़िता सबा कमर को मामले में हस्तक्षेपकर्ता बनने की अनुमति दी। अदालत ने मामले को क्रिमिनल मिस. रिट याचिका संख्या 8732/2026 के साथ जोड़ते हुए 24 अक्टूबर 2026 को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।