दिवाली के बाद महंगी हो सकती हैं खाने-पाने की चीजें!

नवभारतटाइम्स.कॉम•
food items may become expensive after diwali cost pressure on fmcg companies
n पीटीआई, नई दिल्ली: चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में FMCG कंपनियों को मार्जिन के लगातार दबाव का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि इनपुट लागत बढ़ने से मुनाफे पर असर पड़ रहा है। ऐसे में कंपनियां दिवाली के बाद कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही हैं, लेकिन उन्हें इस बात का भी डर है कि इससे ग्राहकों की मांग पर बुरा असर पड़ सकता है-खासकर उन बाजारों और ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां ग्राहक कीमतों को लेकर बहुत संवेदनशील होते हैं।

सितंबर तिमाही में इनपुट-कॉस्ट (लागत) का दबाव बढ़ गया, जिससे पिछली तिमाही में दिखी कुछ राहत खत्म हो गई। इससे कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ा, हालांकि त्योहारी सीजन में ग्राहकों की मांग बनाए रखने के लिए कंपनियों ने लागत के कुछ हिस्से का बोझ खुद उठा लिया। ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर और कंज्यूमर इंडस्ट्री लीडर नवीन मलपानी ने बताया कि अलग-अलग कमोडिटीज (वस्तुओं) पर यह बढ़ोतरी एक जैसी नहीं रही है। कच्चे तेल से जुड़े डेरिवेटिव, पैकेजिंग सामग्री, पाम ऑयल और चीनी मुख्य रूप से दबाव वाले कारक बनकर उभरे हैं।
उन्होंने कहा, ‘रुपये के हिसाब से, सितंबर में पाम ऑयल की कीमतें पिछले साल के मुकाबले लगभग 21 प्रतिशत अधिक थीं। वहीं, चीनी की कीमतें पिछले महीने के मुकाबले 8 प्रतिशत कम होने के बावजूद, पिछले साल की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक बनी रहीं।

मलपानी ने कहा कि लागत में हुई बढ़ोतरी की भरपाई कीमतों में वृद्धि और कामकाज की बेहतर कार्यक्षमता से पूरी तरह नहीं हो पाई है, जिससे ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव पड़ा है। उन्होंने बताया, परिणाम आने से पहले कंज्यूमर स्टेपल्स कंपनियों के समूह में ऑपरेटिंग मार्जिन में साल-दर-साल लगभग 45 बेसिस पॉइंट्स की कमी आएगी।