राधेश्याम की रामकथा

नवभारतटाइम्स.कॉम•
radheshyams ramkatha ramlila reached the common people through simple couplets
रामलीलाओं के मंचन के दौरान आज भी राधेश्याम रामायण की चौपाइयां सुनाई देती हैं। खड़ी बोली की सरल हिंदी में लिखी इन चौपाइयों ने रामकथा को आम लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इसके पीछे एक दिलचस्प प्रसंग है। मोतीलाल नेहरू की पत्नी स्वरूप रानी बीमार थीं। किसी जानने वाले ने रामकथा सुनने की सलाह दी। मोतीलाल ने बरेली के वकील रामस्वरूप खत्री से कहा कि कोई अच्छे गले वाला कथावाचक चाहिए। उन्होंने राधेश्याम और उनके पिता को भेज दिया। दोनों इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के आनंद भवन पहुंचे और वहां लगातार 40 दिनों तक रामकथा सुनाई। कहा जाता है कि इससे स्वरूप रानी की तबीयत में भी सुधार हुआ। इस अनुभव ने राधेश्याम को रामकथा के गहन अध्ययन के लिए प्रेरित किया। मोतीलाल नेहरू के पुस्तक-संग्रह से प्रभावित होकर उन्होंने रामचरित से जुड़ी पुस्तकें जुटाईं और उनको पढ़ा। इसके बाद उन्होंने सरल हिंदी में राधेश्याम रामायण की रचना की। उनकी चौपाइयों ने रामलीला के संवादों को सहज, प्रभावशाली और भावपूर्ण बनाया।