चिंता में दिख रहे BJP नेता,विधानसभा चुनाव लेंगे परीक्षा

नवभारतटाइम्स.कॉम•
bjp leaders concern assembly elections will be a test election commission controversy and opposition get an issue
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली पर दो चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्तियां जताईं। इसका खुलासा होने के बाद से शुरू हुआ विवाद अभी थमता नजर नहीं आ रहा। सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचने के बावजूद सड़कों पर आंदोलन जारी है। BJP के ज्ञानेश के बचाव में उतरने से विवाद को राजनीतिक रंग मिला है। दिल्ली में प्रदर्शन रोकने के लिए मेट्रो स्टेशन बंद करने, ट्रेनें रद्द करने और इंटरनेट बंद करने जैसे कदमों पर सर्वोच्च न्यायालय ने भी सवाल उठाए। कयास हैं कि संसद का शीत सत्र भी इससे अछूता नहीं रहेगा।

विदेश में प्रदर्शन । ज्ञानेश के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में शामिल होने जर्मनी से दिल्ली आए चर्चित यूट्यूबर ध्रुव राठी ने पिछले दिनों इंटरनैशनल डंका बजाने का आह्वान करते हुए लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर के पास प्रदर्शन किया। ब्रिटेन की सांसद जारा सुल्ताना ने भी इसे समर्थन दिया। इसलिए कहा जा रहा है कि राठी के इस प्रदर्शन से विदेश में सरकार के साथ-साथ देश की साख भी प्रभावित हो सकती है।
फैसला मुश्किल । दूसरी ओर, दिल्ली के हालात से निपटने के तरीके, चुनाव आयोग की कार्यशैली और ज्ञानेश कुमार की कथित मनमानी संबंधी कई याचिकाएं शीर्ष अदालत में लंबित हैं। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, उन्हें कानूनी कार्रवाई से मिली सुरक्षा और कामकाज से जुड़े सवालों पर फैसला आसान नहीं होगा। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय के नोटिस से उम्मीद जगी है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्त अब अपनी चुप्पी तोड़ेंगे।

रुख पर नजर । पश्चिम बंगाल में लाखों मतदाताओं के मताधिकार का फैसला सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बनाए गए ट्रिब्यूनल के सामने लंबित था। इसके बावजूद अदालत ने विधानसभा चुनाव कराने का फैसला दे दिया। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि SIR और चुनाव प्रक्रिया पर उठे सवालों पर उसका क्या रुख होगा। हालांकि, इस मुद्दे की गूंज लंबे समय तक सुनाई देने और उसके गहरे राजनीतिक प्रभाव पड़ने के संकेत मिलने लगे हैं।

विपक्ष को मौका । ज्ञानेश कुमार पर मीडिया में हुए खुलासे के बाद आयोग से सवाल कर रहे TDP, JDU और LJP(R) जैसे सहयोगियों को BJP ने शांत कर लिया है। पर, विपक्ष आर-पार के मूड में है। पिछले 12 बरसों से चुनाव-दर-चुनाव हार से बेजार विपक्ष को अब बड़ा मुद्दा मिल गया है।

गंभीर सवाल । आयोग के अपने तर्क हो सकते हैं, लेकिन SIR में 13 करोड़ मतदाताओं का नाम काटना गंभीर सवाल खड़े करता है। यह कुल मतदाताओं का 14% है। पिछले लोकसभा चुनाव में सत्ता पक्ष और विपक्ष के मतों में महज 1% का फासला था। कटे नाम जोड़ने के लिए घर-घर BLO भेजने का फैसला भी SIR की प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा करता है। BJP की चुप्पी भी हैरान करती है।

चुनौती बनी CJP । सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी के बाद बनी CJP सरकार के लिए पहले भी चुनौती बन चुकी है। जुलाई में इसे हल्के में लेने के कारण सरकार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के रूप में अहम विकेट गंवाना पड़ा था। इससे विपक्ष के हौसले बुलंद हुए। सरकार और BJP अभी डगमगाए आत्मविश्वास को संभाल ही रही थीं कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन नई चुनौती बन गया। इस बार सरकार ने CJP को जंतर-मंतर नहीं पहुंचने दिया, लेकिन मुंबई और दिल्ली में सड़कों पर उतरे लोग विपक्ष के लिए संजीवनी बन सकते हैं।

चुनाव में निर्णय । इतना बड़ा मुद्दा मिलने के बावजूद विपक्षी गठबंधन ‘I.N.D.I.A.’ से आम आदमी पार्टी और DMK की दूरी चौंकाती है। ममता बनर्जी और वाम दल भी आपसी मतभेद भुलाकर राहुल गांधी के नेतृत्व में एकजुट हैं। राजनीतिक बढ़त का अंतिम निर्णय चुनावों में होगा, जहां जनधारणा और दलों का मनोबल अहम भूमिका निभाएंगे। कुछ महीनों में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव इस मुद्दे की पहली परीक्षा होंगे। झटकों से उबरने में माहिर BJP धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दुविधा में दिख रही है। उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं के चेहरों पर चिंता भी नजर आने लगी है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं)

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